-मुंबई बम धमाकों के मामले में रिहाई वाली याचिका की खारिज नई दिल्ली,(ईएमएस)। डॉन अबू सलेम की सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में रिहाई वाली याचिका खारिज कर दी है यानी अबू सलेम कानूनी कार्यवाही जारी रहने तक हिरासत में ही रहेगा। 4 नवंबर, 1993 को मुंबई बम विस्फोट मामले में मुंबई पुलिस द्वारा दायर पहली चार्जशीट में अबू सलेम को एक फरार आरोपी के रूप में नामित किया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि सलेम को हथियार ले जाने और छिपाने का काम सौंपा गया था और वह धमाकों की साज़िश से जुड़ा था। उसी साल 12 मार्च को दाऊद इब्राहिम और उसके गिरोह द्वारा समन्वित एक आतंकवादी हमले में मुंबई में एक दर्जन बम विस्फोट किस गए, जिसमें 257 लोग मारे गए थे। सलेम बम धमाकों के साथ-साथ 1995 में मुंबई के एक बिल्डर जैन की हत्या के मामले में भी आरोपी बना रहा। बताया जाता है वह देश छोड़कर भाग गया था और अन्य आरोपी के खिलाफ मुकदमा शुरू होने और खत्म होने तक फरार रहा। बता दें 2002 में ही जांचकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली और सलेम को पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हिरासत में लिया गया। उसने अपना रूप बदलने के लिए प्लास्टिक सर्जरी भी करवाई थी, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद उसके फिंगरप्रिंट के आधार पर उसकी पहचान की गई। एक साल बाद पुर्तगाली सरकार ने 1993 के आतंकवादी हमले समेत भारत में हुए अपराधों में उसकी कथित भूमिका से संबंधित उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर अबू सलेम के प्रत्यर्पण के भारत के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। सलेम ने सरकार के आदेश के खिलाफ पुर्तगाल की अदालतों में अपील की और तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने आश्वासन दिया कि उसे मृत्युदंड या 25 साल से ज़्यादा की जेल की सज़ा नहीं दी जाएगी। 11 नवंबर, 2005 को सलेम को भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया। सिराज/ईएमएस 16फरवरी26