उल्हासनगर, (ईएमएस)। 14 फरवरी, वैलेंटाइन डे, यानी प्यार का दिन, हम न केवल व्यक्तियों के प्रति बल्कि नदी और पर्यावरण के प्रति भी अपना प्रेम व्यक्त करते हुए, उल्हास नदी और वालधुनी नदी के बढ़ते प्रदूषण के समाधान की तलाश कर रहे हैं, नदी के तल को कैसे चौड़ा किया जा सकता है, अत्यधिक प्रदूषण के कारण सीवर बन चुकी और लगभग मृत हो चुकी नदियों को कैसे पुनर्जीवित किया जा सकता है? इस विषय पर गहन विचार-विमर्श और चर्चा के लिए नील्स फार्म हाउस, दहागांव, वाहोली कल्याण में आयोजित बैठक में उल्हास और वालधुनी नदी संरक्षण समिति के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे। सभी ने पर्यावरण के लिए काम करते समय अपने अनुभवों, चुनौतियों और समाधानों पर अपने बहुमूल्य विचार साझा किए।नदियों को बचाना हमारे भविष्य को बचाना है, यह संदेश सभी के मन में मजबूती से बैठ गया था। वालधुनी बिरादरी बदलापुर, अंबरनाथ और उल्हासनगर टीम, उल्हास नदी बचाव समिति बदलापुर और कल्याण टीम, वाटर फाउंडेशन, नील पर्ल फाउंडेशन, युवा यूनिटी के साथ-साथ पत्रकारों, वकीलों और पुलिस मित्रों ने अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही आगामी नदी संरक्षण अभियान को पर्यावरण प्रेमी व हिराली फाउंडेशन की अध्यक्षा स्वर्गीय सरिता खानचंदानी को समर्पित करते हुए, इसे उल्हास वालधुनी सरिता संवर्धन अभियान नाम दिया जाए, ऐसा संकल्प भी किया गया। इस बात की जानकारी वालधुनी बिरादरी के सक्रिय सदस्य शशिकांत दायमा ने दी। संतोष झा- १६ फरवरी/२०२६/ईएमएस