नई दिल्ली (ईएमएस)। 30 साल की उम्र के बाद आहार में नमक और चीनी की मात्रा आधी कर दी जाए तो कई बीमारियों से स्वतः ही बचाव हो सकता है। ये कहना है हैल्थ विशेषज्ञों का । हालांकि, यह बदलाव सभी के लिए आसान नहीं होता। इसी बीच आयुर्वेद में बताए गए कुछ ऐसे सुपरफूड्स हैं जो रक्त शर्करा को नियंत्रित रखते हैं और मधुमेह के खतरे को भी कम करते हैं। सबसे पहले बात मैथी दाना और ओट्स की। दोनों ही इंसुलिन रेजिस्टेंस को संतुलित करने में बेहद प्रभावी माने जाते हैं। इनमें मौजूद ग्लूकोमैनन और बीटा-ग्लूकान नामक घुलनशील फाइबर रक्त में अचानक शुगर बढ़ने से रोकते हैं। यही कारण है कि मधुमेह के शुरुआती मरीजों को भी इनका नियमित सेवन लाभ देता है। दूसरा महत्वपूर्ण संयोजन है दालचीनी और करेला। भारतीय रसोई में आम होने के बावजूद इन दोनों के गुण बेहद विशेष हैं। हफ्ते में तीन दिन करेले का सेवन ब्लड शुगर को प्राकृतिक रूप से कम करता है और दालचीनी सेल्स की गतिविधि बढ़ाकर ग्लूकोज के उपयोग को बेहतर बनाती है। दालचीनी को सुबह खाली पेट पानी के साथ या भोजन में इस्तेमाल करना अधिक लाभकारी माना जाता है। तीसरे स्थान पर आती हैं दालें, अलसी, सत्तू और इसबगोल जो लगभग हर घर में आसानी से उपलब्ध हैं। इन सभी में फाइबर, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 की प्रचुर मात्रा होती है, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है और शुगर लेवल नियंत्रित रहता है। इन्हें नियमित आहार में शामिल करने से न केवल मधुमेह नियंत्रण में मदद मिलती है बल्कि पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। चौथी और जरूरी बात है फलों का सेवन। आहार तभी पूर्ण माना जाता है जब दिन में कम से कम एक फल जरूर खाया जाए। मधुमेह से जूझ रहे लोगों के लिए अमरूद, सेब और नाशपाती सर्वोत्तम विकल्प हैं, क्योंकि इनमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और ये शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देते। सिर्फ आहार ही नहीं, बल्कि दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव भी मधुमेह नियंत्रण में बड़ी भूमिका निभाते हैं। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, हल्की एक्सरसाइज करना, प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय से दूरी रखना और सबसे महत्वपूर्ण पूरी नींद लेना, स्वस्थ जीवनशैली की बुनियाद हैं। सुदामा/ईएमएस 17 फरवरी 2026