बांग्लादेश में 2024 के जैन-जी विद्रोह के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। अब बांग्लादेश में नया चुनाव हो गया है। इस चुनाव में बांग्लादेश की वंशवादी पार्टी के वंशज तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी ले आगे आए हैं। बांग्लादेश में युवाओं ने वंशवादी पार्टी को भारी मात्रा में समर्थन देकर सत्ता तक पहुंचाया है। विद्रोह के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में जो अंतरिम सरकार बनी थी, उसके बाद बांग्लादेश में कुछ हद तक सामान्य स्थिति देखने को मिली थी। तारिक रहमान के माता और पिता दोनों ही प्रधानमंत्री बन चुके हैं। 2007 में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, और उनको जेल भी हुई थी। शेख हसीना की सरकार ने उन्हें कई मामलों में आरोपी ठहराया था। बांग्लादेश में हुए विद्रोह के बाद 2024 में जब अंतरिम सरकार बनी, उस समय उनके ऊपर लगे आरोपों को समाप्त कर दिया गया था। 2026 में उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा और एक बड़ी जीत हासिल की। 12 फरवरी को बांग्लादेश में शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव संपन्न हुए। शेख हसीना पर चुनाव में धांधली कराने का आरोप लगा था। उसकी तुलना में इस चुनाव में इस तरह का कोई आरोप देखने को नहीं मिला है। 2024 में शेख हसीना की मजबूत सत्ता को गिराने वाले युवाओं के नेतृत्व ने इस चुनाव में जो परिणाम दिए हैं, उसने सभी को आश्चर्यचकित किया है। युवा बदलाव के प्रतीक होते हैं। बांग्लादेश के युवाओं ने स्थाई शासन के लिए वंशवादी पार्टी को स्वीकार किया, जिसके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। युवाओं ने आरोपों पर ध्यान न देते हुए तारिक रहमान के ऊपर जो विश्वास जताया, उससे यह बात स्पष्ट है, युवा पीढ़ी जोश में होते हुए भी होश नहीं खोती है। वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान अभी तक कोई संवैधानिक पद पर नहीं रहे हैं। लेकिन वह पार्टी के अंदर प्रभावशाली माने जाते हैं। 2007 में शेख हसीना की सरकार ने उन्हें जेल भेजा था। उसके बाद वह इलाज के लिए बांग्लादेश छोड़कर लंदन चले गए थे। शेख हसीना के शासनकाल में उनके ऊपर कई आरोप लगाए गए थे। 2024 में जब अंतरिम सरकार बनी तब सारे फैसले पलट दिए गए। वह 17 साल के बाद बांग्लादेश लौटे, शेख हसीना के प्रति गुस्सा और तारिक रहमान के प्रति सहानुभूति इस चुनाव में देखने को मिली है। शेख हसीना की सरकार में जिन राजनीतिक दलों को प्रतिबंधित किया गया था, वे इस चुनाव में नई भूमिका में आ गए हैं। इस समय बांग्लादेश आर्थिक एवं कूटनीतिक दबाव को झेल रहा है। बांग्लादेश अल्पविकसित देशों की सूची में शामिल है। उसके सामने इससे बाहर निकलने का लक्ष्य है। भारत सरकार ने शेख हसीना को शरण दी है। जिसके कारण भारत और बांग्लादेश के संबंध में तनाव बना हुआ है। इसी बीच बांग्लादेश, अमेरिका-चीन और पाकिस्तान के करीब आया है। वर्तमान प्रधानमंत्री रहमान के सामने लोकतंत्र को संभालने की सबसे बड़ी चुनौती है। आर्थिक दबाव से भी उन्हें बाहर निकलना है। अमेरिका चीन और भारत के साथ संबंधों में संतुलन बनाने की चुनौती बांग्लादेश की है। जिन युवाओं ने उन्हें सत्ता के शिखर में पहुंचाया है वह भी सम्मान और अवसर मिलने की उम्मीद में है। बांग्लादेश की नई सरकार युवाओं की आकांक्षाओं पर खरा उतरेगी, इस बात की आशा की जा सकती है। तारिक रहमान को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने के लिए युवाओं और बांग्लादेश की आवाम ने उन पर जो भरोसा जताया है, यदि वह उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं दे पाए, तो वह ज्यादा दिनों तक सत्ता पर काबिज नहीं रह पाएंगे। युवा पीढ़ी ज्यादा समय तक इंतजार नहीं करती है। बांग्लादेश के युवाओं ने सारी दुनिया को बता दिया है, कितनी भी मजबूत सत्ता हो उसे हटाया जा सकता है। इस चुनाव का असर निश्चित रूप से भारत के ऊपर भी देखने को मिलेगा। पिछले 12 वर्षों से यहां पर भी वंशवाद को लेकर वर्तमान सरकार गांधी परिवार और कांग्रेस को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है, लेकिन जिस तरह की स्थिति भारत में बन रही है उसमें राहुल गांधी पूरी तरह से प्रभावी भूमिका में सामने आए हैं। बांग्लादेश के चुनाव परिणाम निश्चित रूप से भारत की राजनीति को प्रभावित करने वाले साबित होंगे। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। भारत में भी जेन-जी की सक्रियता बढ़ रही है। उसका असर अब भारत में भी दिखने लगा है। 1947 के पहले से भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के नागरिक एक ही संस्कृति और सोच के साथ रहते आए हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत में जो भी होता है, इसका असर एक दूसरे देश पर पड़ता ही है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। बांग्लादेश में जो बदलाव हुआ है, इसका असर पश्चिम बंगाल और भारत में पड़ना तय माना जा रहा है। ईएमएस / 17 फरवरी 25