- पक्ष–विपक्ष हुआ आमने-सामने भोपाल (ईएमएस)। राजधानी भोपाल में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और उनके हमलों को लेकर आज विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत उठाए गए इस मुद्दे पर सदन में उस समय तीखी नोकझोंक हुई जब विधायक आतिफ अकील ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। विधायक आतिफ अकील ने कहा कि शहर में कुत्तों की नसबंदी के नाम पर केवल कागजी शोर मचाया गया है, जबकि इसके लिए आवंटित भारी-भरकम राशि का सही उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि आवारा कुत्तों के हमलों के कारण मासूम बच्चों की जान जा रही है और अब तो श्मशान घाट व कब्रिस्तान जैसे स्थान भी इन कुत्तों के सुरक्षित अड्डे बन गए हैं। अकील ने भोपाल के पास शेल्टर होम बनाने की पुरानी घोषणा का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस जमीनी कार्रवाई नहीं हुई है। बहस के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब विधायक भंवर सिंह शेखावत ने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर निशाना साधा। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि मंत्री सुन ही नहीं रहे हैं। इस पर आपत्तिजनक संबोधन पर सदन में भारी हंगामा हुआ। विधायक उमाकांत शर्मा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बेजुबान कुत्तों को इस तरह श्रेणीबद्ध करना और मंत्रियों के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना उचित नहीं है। जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन को आश्वस्त किया कि इस मामले में चार अलग-अलग विभाग मिलकर प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने विपक्ष के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि उनके पास आई स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि कुत्ते के काटने से किसी की मौत हुई हो। उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि प्रदेश में नसबंदी करने वाले डॉक्टरों की संख्या कम है और संसाधनों की कमी के चलते अभियान प्रभावित हो रहा है। इस बीच विपक्ष ने बजट के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को लेकर भी घेराबंदी जारी रखी। अंत में मंत्री प्रहलाद पटेल ने हस्तक्षेप करते हुए आपत्तिजनक शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की और कहा कि बिना प्रमाण के केवल हवाई आरोप लगाना सदन की गरिमा के खिलाफ है। कुल मिलाकर, आवारा कुत्तों का मुद्दा सदन में चर्चा का केंद्र बना रहा, जिसमें प्रशासन की विफलता और जनसुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए गए। वीरेंद्र/ईएमएस/17फरवरी2026