क्षेत्रीय
18-Feb-2026


भारतीय ज्ञान परंपरा से सतत विकास पर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का भव्य उद्घाटन छिंदवाड़ा जबलपुर एक्सप्रसे। आईपीएस कॉलेज व राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से सतत विकास के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा विकसित भारत -2047 के लिए दिशा निर्देश विषय पर एफडीडीआई में अंतर्राष्टीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें पद्मश्री उमाशंकर पांडे ने जल ही जीवन है, की सार्वभौमिक, सार्वकालिक और सार्वजनिक उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि सतत विकास हेतु जीवन बीमा नहीं, जल बीमा की नितांत आवश्यकता है। घर का पानी घर में और खेत का पानी खेत में ही रहना चाहिए। हर खेत पर मेड़ और हर मेड़ पर पेड़ लगाने चाहिए। रासायनिक खाद के नाम पर खेतों में जहर बोया जा रहा है। कुलगुरू प्रो. आई पी. त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय शास्त्र परंपरा में सतत विकास के लिए वानस्पतिक संरक्षण पर हजारों संदर्भों से बात की गई है। प्रो. बी. रामानाथन ने कहा कि इस सृष्टि में कोई भी शब्द, व्यक्ति या वनस्पति बेकार नहीं है, सिर्फ उनकी उपयोगिता बताने वाला कोई विशेषज्ञ चाहिए। प्रो. कामेश सतीश पवार ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान की संस्कृति है, इसमें तकनीकी दक्षता को जोडक़र भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाया जा सकता है। प्रो. पीआर. चंदेलकर ने कहा कि भारत के ज्ञान कोष की विरासत के क्रियान्वयन में ही आधुनिक भारत की समस्याओं का समाधान है। प्राचार्य प्रो. जैमिनी खानवे ने कहा कि पहले दुनिया बोलती थी, और भारत सुनता था। अब भारत बोलेगा और दुनिया सुनेगी। ईएमएस/मोहने/ 18 फरवरी 2026