राज्य
18-Feb-2026


:: खरगोन के ब्रेन डेड मरीज का महादान; अहमदाबाद में धड़केगा दिल, इंदौर में होगा लिवर-किडनी का सफल प्रत्यारोपण :: इंदौर (ईएमएस)। जिस इंदौर ने स्वच्छता के मानकों को वैश्विक ऊंचाइयों पर पहुँचाया, वही शहर अब अंगदान के संस्कारों के माध्यम से पूरे देश को एक नई मानवीय दिशा दिखा रहा है। बुधवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के गलियारों में मानवता का एक ऐसा मर्मस्पर्शी अध्याय लिखा गया, जिसने एक परिवार के असीम शोक को सात अन्य परिवारों की खुशियों और जीवनदान में बदल दिया। खरगोन निवासी विजय जायसवाल (49) के ब्रेन स्टेम डेड घोषित होने के बाद उनके परिजनों द्वारा लिया गया साहसी निर्णय समाज के लिए किसी दैवीय वरदान से कम साबित नहीं हुआ। घटनाक्रम के अनुसार, गौशिंदे कॉलोनी (खंडवा रोड, खरगोन) निवासी विजय जायसवाल बीते 15 फरवरी को एक सड़क दुर्घटना में सिर में गंभीर चोट लगने के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे। चिकित्सकों की उच्च स्तरीय टीम ने उन्हें जीवनदान देने का हरसंभव प्रयास किया, किंतु विधि को कुछ और ही मंजूर था। 18 फरवरी की सुबह, गहन चिकित्सकीय परीक्षणों के उपरांत उन्हें आधिकारिक तौर पर ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया गया। जैसे ही यह सूचना प्रशासन तक पहुँची, सम्भागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े के निर्देशन में पूरे तंत्र को मिशन मोड पर सक्रिय किया गया। :: शोक के सागर में साहस की आराधना :: जब पूरा परिवार अपने मुखिया को खोने के असीम दुख में डूबा था, उस विषम घड़ी में विजय जायसवाल की पत्नी श्रीमती आराधना जायसवाल ने अदम्य साहस और चेतना का परिचय दिया। उन्होंने भारी मन से किंतु दृढ़ संकल्प के साथ पति के हृदय, लिवर, दोनों किडनी, पैंक्रियास, लंग्स और इंटेस्टाइन दान करने की सहमति प्रदान की। जब अपना सर्वस्व खोने का गम हो, तब दूसरों के सूने घरों में उजाला करने का यह निर्णय एक महान प्रेरक संदेश बन गया। आराधना जी का यह संकल्प उन सात मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बना जो लंबे समय से मृत्यु से जंग लड़ रहे थे। :: सड़कें मौन, एम्बुलेंस में दौड़ती जिंदगी :: अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में समय सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील कारक होता है। परिजनों की सहमति मिलते ही इंदौर पुलिस ने एमजीएम अस्पताल से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाकर प्रशासनिक मुस्तैदी की मिसाल पेश की। एम्बुलेंस की सायरन गूँजी और शहर की रफ्तार विजय के सम्मान में थम गई, ताकि अंगों को बिना किसी विलंब के सुरक्षित पहुँचाया जा सके। चूँकि मध्य प्रदेश में हृदय के लिए तत्काल कोई उपयुक्त प्राप्तकर्ता उपलब्ध नहीं था, अतः नोटो (NOTTO) के माध्यम से इसे विशेष विमान द्वारा अहमदाबाद के मारेंगो सीआईएमएस अस्पताल के लिए रवाना किया गया। :: धड़कनें अहमदाबाद में, नया जीवन इंदौर में :: प्रत्यारोपण की इस जटिल और महा-प्रक्रिया में अंगों का पारदर्शी एवं नियमसंगत वितरण किया गया। विजय का हृदय अब अहमदाबाद के एक मरीज के सीने में धड़केगा, जबकि उनका लिवर और एक किडनी इंदौर के विशेष जुपिटर हॉस्पिटल में नए जीवन का आधार बनेंगे। दूसरी किडनी चोइथराम अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के एक जरूरतमंद मरीज को आवंटित की गई है। पैंक्रियास, लंग्स और आंतों जैसे अंगों के माध्यम से अन्य गंभीर मरीजों को नवजीवन देने की प्रक्रिया भी राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत तेजी से पूर्ण की गई। :: अमर रहेगा विजय का महादान :: सम्भागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने इस महादान की सराहना करते हुए कहा कि विजय जायसवाल भले ही शारीरिक रूप से इस संसार से विदा हो गए हों, लेकिन वे सात लोगों के जीवन के रूप में सदैव हमारे बीच जीवित रहेंगे। यह घटना न केवल आधुनिक चिकित्सा जगत की सफलता है, बल्कि इंदौर की उस तासीर और मिट्टी का प्रमाण भी है, जहाँ मानवता के मूल्यों को सर्वोपरि रखा जाता है। यह अंगदान इंदौर के इतिहास में परोपकार के एक नए स्वर्णिम युग की घोषणा करता है। प्रकाश/18 फरवरी 2026