हेलसिंकी (ईएमएस)। उत्तरी यूरोप का छोटा-सा देश फिनलैंड है, जहां शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि आनंद और स्वतंत्रता का माध्यम माना जाता है। परिणाम ये हैं कि फिनिश बच्चे दुनिया के सबसे सक्षम छात्रों में गिने जाते हैं। भारत में जहां 90 प्रतिशत अंकों की दौड़ बचपन से ही शुरू हो जाती है, वहीं फिनलैंड में बच्चों को आराम, खेल और जीवन कौशल सीखने पर जोर दिया जाता है। यहां 16 साल की उम्र तक कोई बड़ा एग्जाम ही नहीं होता। इसका परिणाम यह है कि बच्चा न केवल मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है, बल्कि सीखने की क्षमता भी स्वाभाविक रूप से विकसित होती है। आश्चर्य की बात यह है कि बिना प्रतिस्पर्धा वाले इस सिस्टम के बावजूद फिनलैंड अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सूचकांकों में लगातार टॉप पर रहता है। फिनलैंड और भारत की शिक्षा प्रणाली के बीच कई तरह के स्पष्ट अंतर दिखाई देते हैं। सबसे बड़ा अंतर परीक्षाओं को लेकर दृष्टिकोण का है। फिनलैंड के शिक्षक मानते हैं कि बार-बार परीक्षा लेने से बच्चे रटने की प्रवृत्ति अपनाते हैं, जबकि बिना दबाव के वे अवधारणाओं को बेहतर तरीके से समझते हैं। वहीं भारत में नर्सरी से ही टेस्ट और परिणाम का दबाव शुरू हो जाता है, जिससे बच्चों की रचनात्मकता प्रभावित होती है। फिनिश स्कूलों में होमवर्क लगभग न के बराबर होता है। यह माना जाता है कि स्कूल के बाद का समय खेल, परिवार और आराम के लिए होना चाहिए। इसके उलट, भारत में स्कूल के बाद ट्यूशन और होमवर्क मिलाकर बच्चों का अधिकांश समय पढ़ाई में ही निकल जाता है। इससे उनका बचपन सीमित दायरे में बंध जाता है। फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यहां शिक्षक बनने के लिए मास्टर डिग्री अनिवार्य है और केवल शीर्ष 10 प्रतिशत ग्रेजुएट्स को ही यह जिम्मेदारी मिलती है। शिक्षकों को क्लासरूम में पूरा अधिकार होता है कि वे किस तरह बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं। भारत में शिक्षकों की ट्रेनिंग और क्वॉलिटी में अभी भी काफी सुधार की आवश्यकता है। एक और खास बात यह है कि फिनलैंड समानता पर आधारित शिक्षा प्रणाली अपनाता है। यहां निजी स्कूल लगभग नहीं के बराबर हैं, और सभी बच्चे अमीर हो या गरीब एक ही गुणवत्ता वाली शिक्षा पाते हैं। स्कूलों की कोई रैंकिंग नहीं होती, जिससे अनावश्यक प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाती है। फिनलैंड में स्कूलिंग भी देरी से शुरू होती है। बच्चे 7 साल की उम्र में औपचारिक शिक्षा शुरू करते हैं। पहले छह साल केवल खेल और प्राकृतिक तरीके से सीखने पर ध्यान दिया जाता है। सुदामा/ईएमएस 19 फरवरी 2026