नई दिल्ली (ईएमएस)। हर किसी के पेट में गैस बनना और उसका बाहर निकलना एक सामान्य प्रक्रिया है। हमारा शरीर रोज कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं से गुजरता है। इनमें से एक है पेट में गैस का बनना। हैल्थ एक्सपर्टस की माने तो गैस को बार-बार रोकना सेहत के लिए नुकसानदायक है। इसलिए अपने शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया को रोकने के बजाय, उसे सामान्य रूप से काम करने दें और स्वस्थ रहें। भोजन पाचन के दौरान आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया खाने को तोड़ते हैं, जिससे गैस बनती है। यह गैस गुदा के माध्यम से बाहर निकलती है, जिसे आम भाषा में पाद या फार्ट कहा जाता है। यह पूरी तरह स्वाभाविक और जरूरी है। लेकिन अक्सर लोग शर्म, असहजता या सामाजिक माहौल की वजह से गैस को रोक लेते हैं। कभी-कभार ऐसा करना नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसे आदत बना लेना शरीर के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। गैस रोकने से पहला असर पेट में महसूस होता है। जब गैस बाहर नहीं निकलती तो वह आंतों में ही जमा होती रहती है, जिससे पेट में दबाव बढ़ता है। यह दबाव दर्द, मरोड़ और खिंचाव का कारण बन सकता है। कई बार ऐसा लगता है कि पेट में कुछ फंसा हुआ है या भीतर से खिंचाव हो रहा है। लंबे समय तक गैस रोकने से यह असहजता बढ़ जाती है। गैस रुकने की एक और बड़ी समस्या है पेट फूलना। पेट सख्त और भारी महसूस होने लगता है। अक्सर ऐसा लगता है जैसे बहुत ज्यादा खा लिया हो, जबकि असल समस्या गैस की होती है। इससे कपड़े टाइट लगने लगते हैं और बैठने-झुकने में परेशानी हो सकती है। वहीं, पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ने से एसिडिटी, सीने में जलन और खट्टी डकारें भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि पेट में फंसी गैस एसिड को ऊपर की ओर धकेलती है। कुछ लोगों में गैस रोकने का असर सिरदर्द, बेचैनी और चिड़चिड़ापन के रूप में भी दिख सकता है। शरीर में दबाव बढ़ने से मानसिक स्थिति प्रभावित होती है। वहीं, बार-बार गैस रोकने से पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे अपच, बदहजमी, डकार और उल्टी जैसा महसूस होना जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। लगातार गैस रोकने से आंतों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। हालांकि इससे कोई गंभीर बीमारी तुरंत नहीं होती, लेकिन यह पाचन से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकता है। कुछ मामलों में गैस शरीर में दोबारा अवशोषित होकर सांस के जरिए बाहर निकल सकती है, पर इससे समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। ऐसे में जरूरी है कि शरीर के प्राकृतिक संकेतों को समझा जाए। गैस बनना बिल्कुल सामान्य है, इसलिए इसे लेकर शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है। यदि गैस ज्यादा बनती है, तो खान-पान में बदलाव करें। तला-भुना, मसालेदार और गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ कम करें। भोजन धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबा कर खाएं। नियमित व्यायाम और हल्की वॉक पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। अगर गैस, एसिडिटी या पेट दर्द की समस्या लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। सुदामा/ईएमएस 19 फरवरी 2026