ज़रा हटके
20-Feb-2026
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अमेरिकी अधिकारी का दावा लोप नूर साइट पर अंडरग्राउंड ब्लास्ट, ‘डीकपलिंग’ तकनीक से छिपाने की कोशिश वाशिंगटन,(ईएमएस)। भारत-चीन गलवान तनाव के एक सप्ताह बाद चीन द्वारा कथित रूप से गुप्त परमाणु परीक्षण किए जाने का दावा सामने आया है। अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ आर्म्स कंट्रोल अधिकारी क्रिस्टोफर ए फोर्ड ने कहा है कि 2020 में चीन ने एक अंडरग्राउंड न्यूक्लियर ब्लास्ट किया, जिसका संकेत कज़ाकिस्तान के मकानची स्थित सीस्मिक स्टेशन पर दर्ज हुआ। उनके अनुसार, इस विस्फोट की तीव्रता 2.75 मैग्नीट्यूड आंकी गई और उसका सिग्नेचर सामान्य भूकंप जैसा नहीं था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह परीक्षण चीन द्वारा हस्ताक्षरित सीटीबीटीओ के दायित्वों की भावना के विपरीत है। हालांकि चीन ने आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी परीक्षण की पुष्टि नहीं की है। वियना स्थित संगठन के कार्यकारी सचिव रॉबर्ट फ्लॉयड ने भी लोप नूर परीक्षण स्थल के पास दो असामान्य भूकंपीय घटनाओं का उल्लेख किया, लेकिन उनकी शक्ति 500 टन विस्फोट की औपचारिक सीमा से कम बताई गई। रिपोर्टों के मुताबिक चीन ने ‘डीकपलिंग’ तकनीक का उपयोग किया, यह ऐसी विधि है जिसमें भूमिगत गहरी खोह में विस्फोट कर भूकंपीय संकेतों को कम किया जाता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी प्रणालियों से बचा जा सके। परीक्षण स्थल के रूप में लोप नूर का नाम सामने आया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये दावे सही हैं, तो इसका उद्देश्य मिसाइलों की सटीकता और मारक क्षमता को उन्नत करना हो सकता है। इससे चीन की परमाणु नीति ‘न्यूनतम प्रतिरोध’ से आगे बढ़ने के संकेत मिलते हैं। भारत के संदर्भ में यह विकास सामरिक संतुलन और ‘नो फर्स्ट यूज़’ सिद्धांत पर नई बहस को जन्म दे सकता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन गलवान संघर्ष के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में परमाणु आयाम जुड़ने की आशंका ने रणनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। हिदायत/ईएमएस 20 फरवरी 2026