अंतर्राष्ट्रीय
22-Feb-2026
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ढाका,(ईएमएस)। बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न हुए 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के नतीजों के बाद सांसदों की पृष्ठभूमि को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। देश के प्रमुख नागरिक संगठन सुशासन के लिए नागरिक (शुजन) द्वारा जारी एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, नवनिर्वाचित 43 सांसदों पर हत्या जैसे संगीन अपराधों के मामले दर्ज हैं। यह विश्लेषण सांसदों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों के आधार पर तैयार किया गया है, जो बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण और धनबल के प्रभाव की ओर संकेत करता है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख राजनीतिक दलों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जिसने इस चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है, के सांसदों पर सबसे अधिक कानूनी मामले दर्ज हैं। बीएनपी के निर्वाचित सदस्यों में से 50.24 प्रतिशत वर्तमान में विभिन्न आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। वहीं, कट्टरपंथी दल बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी दूसरे स्थान पर है, जिसके 47.07 प्रतिशत सांसदों पर मौजूदा मुकदमे लंबित हैं। कुल मिलाकर 142 सांसदों पर इस समय कानूनी कार्यवाही चल रही है, जबकि 185 सांसद अतीत में ऐसे मामलों का सामना कर चुके हैं। 95 सांसद ऐसे हैं जिन पर पुराने और वर्तमान दोनों ही प्रकार के मामले दर्ज हैं। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ कानूनी मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। शिक्षा और पेशे की बात करें तो 297 निर्वाचित सांसदों में से केवल आठ के पास पीएचडी डिग्री है। सांसदों के एक बड़े हिस्से, यानी 138 के पास स्नातकोत्तर और 93 के पास स्नातक की डिग्री है, जबकि शेष सांसदों ने स्कूली स्तर तक ही शिक्षा प्राप्त की है। पेशेवर पृष्ठभूमि के लिहाज से संसद में व्यापारियों का दबदबा बरकरार है। 182 सांसद (लगभग 61 प्रतिशत) व्यवसाय से जुड़े हैं, जो राजनीति में कॉर्पोरेट हितों की बढ़ती पैठ को दर्शाता है। वकीलों की संख्या 36 है, जबकि शिक्षा, कृषि और सरकारी सेवाओं से जुड़े प्रतिनिधियों की संख्या काफी कम है। संपत्ति के मामले में भी यह संसद काफी संपन्न है। विश्लेषण के अनुसार, 271 सांसदों की व्यक्तिगत संपत्ति एक करोड़ टका से अधिक है, जबकि 187 सांसद पांच करोड़ टका से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं। बीएनपी के 209 सांसदों में से 201 करोड़पति की श्रेणी में आते हैं। रिपोर्ट के मुख्य समन्वयक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संपन्न उम्मीदवारों के जीतने की संभावना अधिक रही है, जो राजनीति में कम आय वाले और आम लोगों की घटती भागीदारी को दर्शाता है। हालांकि 12 फरवरी को हुआ मतदान और जनमत संग्रह अधिकांशतः शांतिपूर्ण रहा, लेकिन सांसदों की यह प्रोफाइल लोकतांत्रिक शुचिता पर कई सवाल खड़े करती है। वीरेंद्र/ईएमएस 22 फरवरी 2026