अंतर्राष्ट्रीय
22-Feb-2026
...


वॉशिंगटन (ईएमएस)। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की व्यापक रूपरेखा तैयार कर ली है। दो शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि कूटनीतिक बातचीत के मौजूदा प्रयास विफल रहते हैं, तो अमेरिका कई हफ्तों तक चलने वाले भीषण हवाई और सामरिक हमले शुरू कर सकता है। इस सैन्य योजना के केंद्र में न केवल ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के ठिकाने और विवादास्पद परमाणु सुविधाएं हैं, बल्कि कुछ अत्यंत आक्रामक विकल्पों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके संभावित उत्तराधिकारी व बेटे मोजतबा खामेनेई को भी सीधे तौर पर निशाना बनाने की बात कही गई है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि क्या अमेरिका केवल हवाई हमलों तक सीमित रहेगा या इसमें जमीनी सेना की भूमिका भी शामिल होगी। जंग के इन बादलों के बीच यूरेनियम संवर्धन को लेकर एक अप्रत्याशित कूटनीतिक हलचल भी देखी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार है जिसमें ईरान को अत्यंत सीमित और केवल प्रतीकात्मक परमाणु संवर्धन की अनुमति दी जा सकती है। इस प्रस्ताव की अनिवार्य शर्त यह है कि ईरान को परमाणु बम बनाने के सभी संभावित रास्तों को पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद करना होगा। यह संकेत देता है कि दोनों देशों के कड़े रुख के बावजूद समझौते की एक बारीक खिड़की अभी भी खुली है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की ओर से आने वाले किसी भी नए प्रस्ताव का मानक बहुत ऊंचा होगा और उसे क्षेत्र के अन्य देशों के लिए भी भरोसेमंद होना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बयान दिया कि उनका देश दो से तीन दिनों के भीतर एक नया परमाणु प्रस्ताव तैयार कर लेगा। इसके बावजूद, अमेरिकी और इजराइली रक्षा गलियारों में यह चर्चा तेज है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी समय सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं, यहाँ तक कि इसी सप्ताहांत भी। ट्रंप के कुछ सलाहकार उन्हें फिलहाल इंतजार करने और सैन्य लामबंदी के जरिए दबाव बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रपति के हाथ में है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने मीडिया में चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि अंतिम फैसला केवल राष्ट्रपति ही करेंगे। फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई जा रही है, जो इस बात का संकेत है कि अगर बातचीत की मेज पर समाधान नहीं निकला, तो युद्ध अब ज्यादा दूर नहीं है। वीरेंद्र/ईएमएस 22 फरवरी 2026