व्यापार
22-Feb-2026
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- वैश्विक व्यापार और अमेरिकी आयात नीति पर अस्थिरता के बावजूद निवेशकों में सकारात्मक उम्मीदें मुंबई (ईएमएस)। भारत का शेयर बाजार पिछले सप्ताह तेज बढ़त के साथ बंद हुआ और निवेशकों की निगाहें अब इस सप्ताह पर टिकी हैं। इसका प्रमुख कारण अमेरिका में आयात शुल्कों में हाल ही में हुए बदलाव हैं, जो वैश्विक व्यापार और निवेश धाराओं पर सीधे असर डालते हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए ऊंचे आयात शुल्कों को रद्द कर दिया, जिससे वैश्विक बाजारों में नई उम्मीदें जगी हैं। इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने 20 फरवरी को घोषणा की कि सभी देशों के लिए 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत आयात शुल्क लागू होगा, जो 24 फरवरी से प्रभावी होगा। हालांकि, 21 फरवरी को ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि यह दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। इस कदम से वैश्विक व्यापार और अमेरिकी आयात नीति पर अस्थिरता के बावजूद, निवेशकों में सकारात्मक उम्मीदें बनी हैं। भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 18 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का प्रावधान किया था। अगर अमेरिकी प्रशासन वास्तव में इस दर को 10-15 प्रतिशत तक कम करता है, तो भारतीय उत्पाद अमेरिका में सस्ते होंगे, जिससे निर्यात बढ़ सकता है। यह स्थिति भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और विदेशी निवेश प्रवाह के लिए लाभकारी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी आयात शुल्क में संभावित कमी से भारतीय शेयर बाजार में लिवाल निवेशकों की संख्या बढ़ सकती है। इसके परिणामस्वरूप पिछले सप्ताह की तेजी इस सप्ताह भी जारी रहने की संभावना है। विशेष रूप से उन सेक्टर्स में, जो अमेरिका के निर्यात पर निर्भर हैं, निवेशकों की रुचि अधिक रहेगी। सतीश मोरे/22फरवरी ---