व्यापार
22-Feb-2026


-ट्रंप के नए टैरिफ विवाद के बीच अहम बैठक टली, तीन दिन तक व्यापार वार्ता पर होना था मंथन नई दिल्ली (ईएमएस)।भारत और अमेरिका के बीच होने वाली अंतरिम व्यापार समझौते (ट्रेड डील) पर बातचीत फिलहाल टल गई है। दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों की जो अहम बैठक 23 फरवरी से वॉशिंगटन में शुरू होने वाली थी, उसे अब आगे की तारीख के लिए टाल दिया गया है। इस बैठक में भारत की ओर से वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव दर्पण जैन मुख्य वार्ताकार थे और भारतीय टीम तीन दिन तक अमेरिका में चर्चा करने वाली थी। इस बैठक का मकसद अंतरिम व्यापार समझौते के कानूनी दस्तावेज को अंतिम रूप देना था। दरअसल, यह पूरा मामला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ फैसलों से जुड़ा हुआ है। ट्रंप ने हाल ही में सभी देशों पर पहले 10 प्रतिशत और फिर बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। इससे पहले अमेरिका ने 2025 में भारत पर कुल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया था, जिसमें से 25 प्रतिशत पहले ही हटाया जा चुका है। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल में ट्रंप के पुराने टैरिफ फैसलों को अवैध बताया था और कहा था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से ज्यादा कदम उठाए। इसी वजह से अब व्यापार नीति को लेकर स्थिति थोड़ी अनिश्चित बनी हुई है। अगर नई 15 प्रतिशत ड्यूटी लागू होती है, तो यह पहले से लगने वाले आयात शुल्क के ऊपर लगेगी। यानी किसी उत्पाद पर अगर पहले 5 प्रतिशत ड्यूटी है, तो कुल मिलाकर वह 20 प्रतिशत हो जाएगी। अगले महीने होना था ट्रेड डील पर हस्ताक्षर दोनों देशों ने पहले ही इस साल मार्च तक अंतरिम ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने और अप्रैल से उसे लागू करने का लक्ष्य रखा था। यह समझौता भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत के करीब 18 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को जाते हैं। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 186 अरब डॉलर का रहा था। इस ट्रेड डील के कारण भारत का टैरिफ घटा था कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने 7 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के साथ ट्रेड डील की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारतीय कृषि उत्पाद अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात किए जाएंगे, जबकि अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। इसके अलावा भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर (45 लाख 30 हजार करोड़ रुपए) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई। इसके बाद अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क जारी किया गया था। इसके तहत ही भारतीय सामान पर अमेरिका का टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भी हटा लिया गया था। भारत पर कितना टैरिफ लगेगा अब ट्रम्प के टैरिफ में बदलाव से भारत पर लगे टैरिफ को लेकर यह भी सवाल उठ रहा है कि भारत को 18 प्रतिशत टैरिफ देना होगा या 15 प्रतिशत। इसकी दो वजहें हैं-राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह पहले की तरह आगे बढ़ेगी। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ सहित अमेरिका के साथ व्यापार समझौते करने वाले देशों को अब धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ का ही सामना करना पड़ेगा, न कि उस टैरिफ दर का जिस पर उन्होंने पहले बातचीत की थी। इस आधार पर शनिवार के ऐलान के बाद 15 प्रतिशत रहेगा। भारत पर कुल टैरिफ 18 प्रतिशत घटकर 15 प्रतिशत रह जाएगा, जबकि ट्रम्प का बयान 18 प्रतिशत टैरिफ की ओर इशारा कर रहा है। टैरिफ बदलाव से भारत-अमेरिकी ट्रेड डील संकट में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बन गई थी और इसे लेकर फ्रेमवर्क जारी हो चुका है। दोनों देशों ने कहा था कि इस फ्रेमवर्क को जल्द लागू किया जाएगा और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ेगी। भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान के मुताबिक, यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी 2025 को शुरू हुई भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते वार्ता को आगे बढ़ाएगा। इस समझौते में आगे चलकर बाजार पहुंच, सप्लाई चेन को मजबूत करने और ट्रेड बैरियर कम करने जैसे प्रावधान शामिल होंगे। पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को बताया था कि समझौता फरवरी के अंत तक फाइनल होना था। मार्च में इस पर हस्ताक्षर होने थे, वहीं अप्रैल से ये समझौता पूरी तरह लागू होता। इसके साथ ही भारत आने वाले कुछ महीनों में दुनिया के बड़े देशों साथ व्यापारिक समझौतों पर अंतिम मुहर लग जाती। इस डील से भारत को मिलने वाले फायदे अमेरिकी टैरिफ में कमी भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका के टैरिफ को 18 प्रतिशत तक घटाया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। चुनिंदा उत्पादों पर जीरो टैरिफ जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे और विमान पाट्र्स पर पूरी तरह टैरिफ खत्म किया जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक पहुंच भारतीय एमएसएमई, किसान, मछुआरे, महिलाओं और युवा उद्यमियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रवेश। निर्यात क्षेत्रों में बढ़ावा टेक्सटाइल, चमड़ा और फुटवियर, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी में नए अवसर। सेक्शन 232 छूट विमान पाट्र्स पर अमेरिकी सेक्शन 232 के तहत छूट मिलेगी। ऑटो पाट्र्स पर टैरिफ रेट कोटा कुछ ऑटो कंपोनेंट्स के लिए अमेरिका में विशेष पहुंच मिलेगी। जेनेरिक दवाओं पर बेहतर शर्तें भारतीय जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स के लिए टैरिफ और नियामक नियमों में सुधार। भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर सुरक्षित रखे थे भारत और अमेरिका के बीच कृषि और डेयरी सेक्टर के कारण ट्रेड डील रुका हुआ था। हालांकि, फरवरी में जारी फ्रेमवर्क में भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा। पीयूष गोयल ने बताया था कि भारत ने मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा है। इन उत्पादों पर अमेरिका को कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालांकि, संयुक्त बयान के अनुसार भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म या कम करने पर सहमति जताई है। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु चारे के लिए रेड सोरघम, ड्राई फ्रूट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं। विनोद कुमार उपाध्याय, 22 फरवरी, 2026