जोधपुर,(ईएमएस)। राजस्थान की ब्लू नगरी जोधपुर में माली समाज की 333 वर्षों पुरानी परंपरा, राव की गैर, होली के दूसरे दिन धूलंडी के मौके पर मंडोर क्षेत्र में धूमधाम से निकाली जाती है। यह आयोजन माली समाज के हजारों लोगों के सहयोग से संपन्न होता है और शहर के अन्य लोग भी इस परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं। स्थानीय निवासी के अनुसार यह परंपरा सदियों से शांतिपूर्ण तरीके से निभाई जा रही है। इस वर्ष भी राव की गैर मंडावता बेरा मंदिर चौक से पूजा-अर्चना के बाद खोखरिया बेरा पहुंचेगी और वहां से मंडावता चौराहा होते हुए भियाली बेरा और गोपी का बेरा होते हुए फतेहबाग पहुंचेगी। गैर में चंग की थाप पर विभिन्न तोलियां नृत्य और गीत प्रस्तुत करती हैं। गेर का समापन मंडोर उद्यान में स्थित राव कुंड पर होता है। गैर में राव का चयन एक विशेष परंपरा के अनुसार किया जाता है। लोकल रहवासी के अनुसार राव वह नवविवाहित युवक होता है, जो कद-काठी में उत्तम और नृत्य में निपुण हो। मंडावता बेरा के शिव मंदिर से लगभग दोपहर ढाई बजे गेर का आगाज होता है। खोखरिया बेरा से राव का चयन किया जाता है, जहां युवक की पीठ पर छापा लगाकर उसे राव घोषित किया जाता है और उसके बाद उसका शृंगार किया जाता है। राव के चयन के बाद गेर आमली बेरा, लाला बेरा, मंडोर रेलवे ओवरब्रिज के नीचे से भलावता बेरा होते हुए मंडोर चौराहे के रास्ते मंडोर उद्यान में प्रवेश करती है। इस गैर में आठ बेरों की टोली सम्मिलित होती है, जिनमें खोखरिया बेरा, बड़ा बेरा, गोपी बेरा, आमली बेरा, फूलबाग बेरा, नागौरी बेरा, मंडोर बेरा और पदाला बेरा शामिल हैं। राव को सुरक्षित रूप से राव कुंड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मंडावता बेरा के लोगों की होती है। इनके हाथों में लाठियां और हॉकियां होती हैं, और वे राव का घेरा बनाकर उसे आगे ले जाते हैं। राव कुंड में पहुंचकर सबसे पहले स्वयं डुबकी लगाता है और उसके बाद अन्य युवक स्नान करते हैं। जैसे ही राव कुंड में स्नान करता है, सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी हो जाती है। यह परंपरा न केवल माली समाज की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती है, बल्कि शहर में उत्सव का जीवंत स्वरूप भी प्रस्तुत करती है। राव की गैर में शामिल तोलियों के नृत्य, गीत और उत्साहपूर्ण माहौल इस और भी यादगार बनाते हैं। 333 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी युवा और बुजुर्ग सभी के लिए गर्व और उल्लास का कारण बनी हुई है, जो जोधपुर के रंग-बिरंगे उत्सवों में अपनी विशेष जगह बनाए रखती है। आशीष/ईएमएस 24 फरवरी 2026