अंतर्राष्ट्रीय
24-Feb-2026
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-जानें कैसे नकल को बिजनेस स्ट्रेटेजी में बदला बीजिंग,(ईएमएस)। चीन में ‘शानझाई’ शब्द का शाब्दिक अर्थ भले डकैतों के अड्डे से जुड़ा हो, लेकिन आधुनिक दौर में यह उन औद्योगिक इलाकों का प्रतीक बन गया जहां दुनियाभर के पायरेटेड या नकली उत्पाद तैयार होते रहे। भारत में जिसे आम बोलचाल में ‘नो गारंटी’ वाला सामान कहा जाता है। लेकिन इसी शानझाई संस्कृति ने चीन की औद्योगिक छलांग की नींव रखी। चीन की आर्थिक तरक्की लंबे समय तक दुनिया के लिए पहेली रही, पर इसकी एक बड़ी वजह उसकी ‘कॉपीकैट’ नीति रही है। जहां पश्चिमी देश मौलिकता (ऑरिजिनैलिटी) पर जोर देते हैं, वहीं चीन ने ‘फास्ट फॉलोअर’ रणनीति अपनाई। यानी अगर कोई आइडिया दुनिया के किसी बाजार में सफल है, तो उसे शून्य से विकसित करने के बजाय तेज़ी से अपनाकर, सुधार कर और कम कीमत में उतार दो। इससे जोखिम घटता है और बाजार में तेजी से पैठ बनती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीन में इस सोच को संस्थागत रूप देने वालों में प्रमुख नाम है प्रो. शियांग बिंग, जो च्युंग कांग ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के संस्थापक डीन रहे हैं। उनके कई छात्र आज अलीबाबा और टिकटॉक जैसी कंपनियों में शीर्ष पदों पर हैं। बिंग का तर्क है, दौड़ने से पहले चलना सीखना पड़ता है, और उससे पहले किसी का सहारा लेकर खड़ा होना। यानी विकास के शुरुआती चरण में नकल करना व्यावहारिक रणनीति हो सकती है। मोबाइल और गैजेट उद्योग इसका बड़ा उदाहरण है। जब ऐपल ने आईफोन लॉन्च किया, तो चीनी कंपनियों ने सिर्फ फोन ही नहीं, बल्कि स्टोर डिजाइन और प्रेजेंटेशन स्टाइल तक से प्रेरणा ली। जियोमी को एक समय ‘चीन का ऐपल’ कहा जाता था। इसके संस्थापक लेई जुन अक्सर स्टीव जॉब्स जैसी सादगीभरी वेशभूषा में लॉन्च इवेंट करते दिखते थे। शाओमी का एमआईयूआई सॉफ्टवेयर और शुरुआती डिजाइन स्पष्ट रूप से आईफोन से प्रेरित था, लेकिन रणनीति अलग थी, आधी कीमत में एक जैसा अनुभव। इसी मॉडल पर ओप्पो, विवो और रियलमी ने भी विस्तार किया और कई बाजारों में सेमसंग व ऐपल को कड़ी टक्कर दी। आज चीन सिर्फ नकल करने वाला देश नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत विनिर्माण में अग्रणी बनने की राह पर है। लेकिन इसकी कहानी बताती है कि कभी-कभी नकल भी नवाचार की पहली सीढ़ी बन सकती है। हिदायत/ईएमएस 24 फरवरी 2026