लंदन (ईएमएस)। दुनिया के सबसे एकांत और दुर्गम क्षेत्रों में से एक अंटार्कटिका से चिंताजनक खबर सामने आई है। यूनिवर्सिटी ऑफ केंटकी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाया कि अंटार्कटिका का एकमात्र मूल निवासी कीट, बेल्जिका अंटार्कटिका, अब माइक्रोप्लास्टिक्स का सेवन कर रहा है। यह पहला शोध है जो जंगली कीटों में प्लास्टिक कणों की पुष्टि करता है। इस परियोजना की शुरुआत 2020 में पीएचडी छात्र ने की थी। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि क्या अंटार्कटिका जैसी दुर्लभ जगहें भी प्लास्टिक प्रदूषण से सुरक्षित हैं। बेल्जिका अंटार्कटिका एक बिना काटने वाली छोटी मिज है, जो चावल के दाने के आकार की होती है। यह पृथ्वी पर सबसे दक्षिणी कीट है और अंटार्कटिका की एकमात्र मूल निवासी प्रजाति है। इसके लार्वा काई और शैवाल की नम परतों में रहते हैं और मृत पौधों को खाकर वहां की मिट्टी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखते हैं। शोधकर्ता के अनुसार, ये कीट पॉली-एक्सट्रीमफाइल्स हैं और अत्यधिक ठंड, निर्जलीकरण, उच्च लवणता और यूवी विकिरण सहन कर सकते हैं। शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि क्या उनकी यह मजबूती माइक्रोप्लास्टिक्स जैसे नए खतरों से बचा सकती है। नियंत्रित प्रयोगों में देखा गया कि प्लास्टिक के उच्च स्तर के बावजूद कीटों की जीवित रहने की दर और चयापचय में कोई बदलाव नहीं आया। हालांकि, गहरे विश्लेषण से पता चला कि माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में आने वाले लार्वाओं के वसा भंडार में कमी आई। अंटार्कटिका की कठोर जलवायु में ऊर्जा संचयन के लिए वसा अत्यंत महत्वपूर्ण है। शोध टीम ने 2023 में अंटार्कटिक प्रायद्वीप के 13 द्वीपों से 20 स्थानों के जंगली लार्वा इकट्ठा किए। उन्नत इमेजिंग और रासायनिक फिंगरप्रिंट तकनीक से 40 लार्वाओं का परीक्षण किया गया, जिनमें से दो में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए। शोधकर्ता इस बात को शुरुआती चेतावनी मानते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि अंटार्कटिका में प्लास्टिक स्तर कम है, यह स्पष्ट है कि यह अब वहां के पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवेश कर चुका है और कीटों के ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर रहा है। यह खोज दर्शाती है कि प्लास्टिक प्रदूषण दुनिया के किसी भी कोने से अछूता नहीं रहा, और यहां रहने वाले छोटे कीटों में भी इसके प्रभाव दिखने लगे हैं। आशीष/ईएमएस 24 फरवरी 2026