- सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंक लुढ़का, आईटी शेयरों पर दबाव मुंबई (ईएमएस)। अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला और शुरुआती घंटों में बिकवाली का दबाव बढ़ता गया। शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 242 अंक गिरकर 83,053 पर खुला। कुछ ही देर में यह करीब 500 अंक टूटकर 82,725.30 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। सुबह करीब 9:30 बजे सेंसेक्स 557.14 अंकों यानी 0.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,737.52 पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 25,713 के मुकाबले 71 अंक गिरकर 25,641.80 पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 154.20 अंक यानी 0.60 प्रतिशत फिसलकर 25,558.80 पर ट्रेड करता दिखा। निफ्टी के सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। व्यापक बाजार में भी कमजोरी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.72 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई मिडकैप 150 और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स भी क्रमश: 0.5 और 0.6 प्रतिशत नीचे रहे। सेक्टरवार प्रदर्शन में निफ्टी आईटी सबसे ज्यादा 3.34 प्रतिशत टूटा। आईटी दिग्गजों में इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एचसीएल टेक प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके अलावा ऑटो, एफएमसीजी और बैंकिंग सेक्टर में भी दबाव देखा गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, 25,850–25,900 का स्तर निफ्टी के लिए मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है, जबकि 25,550–25,600 का दायरा निकटतम सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। निवेशक फिलहाल वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। बाजार के जानकार के अनुसार दो सत्रों तक लगातार बिकवाली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 23 फरवरी को वापसी करते हुए 3,843 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। इसके साथ ही वे इस महीने के लिए भी नेट खरीदार बन गए हैं। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 1,292 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। उनका कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को सतर्क और चयनात्मक रणनीति अपनानी चाहिए। बाजार में गिरावट के दौरान मजबूत बुनियादी स्थिति वाले शेयरों पर ध्यान देना बेहतर रहेगा। मौजूदा स्तरों पर आक्रामक खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। निफ्टी में 26,000 के स्तर के ऊपर मजबूती और टिकाऊ ब्रेकआउट के बाद ही नई खरीदारी का मजबूत अवसर बन सकता है। तब तक जोखिम प्रबंधन के साथ स्टॉक-स्पेसिफिक रणनीति अपनाना समझदारी होगी। सतीश मोरे/24फरवरी ---