क्षेत्रीय
24-Feb-2026
...


- केदारनाथ धाम को मुक्त कराने सडक़ों पर उतरे साधु-संत गुना (ईएमएस)। । जिले की महोदरा पंचायत स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र, महाभारत कालीन केदारनाथ धाम को पुन: खुलवाने के लिए अब साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन सुरक्षा के नाम पर पिछले तीन वर्षों से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है। चट्टान का बहाना और आस्था पर पहरा गौरतलब है कि करीब तीन साल पहले पहाड़ी की एक चट्टान में दरार आने और उसके खिसकने की आशंका जताते हुए प्रशासन ने इस प्राचीन देव स्थल पर आम नागरिकों के प्रवेश और पूजा-अर्चना पर रोक लगा दी थी। श्रद्धालुओं का आरोप है कि इतने लंबे समय बाद भी प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने या वैकल्पिक मार्ग बनाने की जहमत नहीं उठाई। वर्तमान में मंदिर के पट बंद होने से न केवल दर्शन रुके हैं, बल्कि प्रकृति द्वारा शिवलिंग के स्वत: जलाभिषेक के अद्भुत दृश्य से भी भक्त वंचित हैं। अस्थि विसर्जन भी रुका, प्रयागराज जैसा है महत्व ज्ञापन सौंपने पहुँचे प्रबुद्धजनों ने बताया कि क्षेत्रवासियों के लिए केदारनाथ धाम का महत्व प्रयागराज और सोरोजी के समान है। यहाँ स्थित पवित्र कुंड में सदियों से लोग अस्थि विसर्जन करते आए हैं, लेकिन प्रशासन की पाबंदी के कारण यह धार्मिक परंपरा भी पूरी तरह ठप पड़ गई है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह बेरुखी धार्मिक आस्था पर सीधा कुठाराघात है। वन विभाग से मुक्ति और पुजारी को अनुमति की मांग प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर के समक्ष प्रमुख रूप से तीन मांगें रखी हैं। जिसमें मंदिर के महंत और पुजारी को तत्काल प्रभाव से दैनिक पूजा के लिए नीचे जाने की अनुमति दी जाए। खिसकी हुई चट्टान के अवरोध को हटाकर यात्रियों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता तैयार किया जाए। वहीं संपूर्ण केदारनाथ धाम परिसर को वन विभाग के नियंत्रण से मुक्त कर इसे स्वतंत्र धार्मिक न्यास के रूप में विकसित किया जाए। श्रद्धालुओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही भगवान भोलेनाथ के द्वार आम जनता के लिए नहीं खोले गए, तो जिले भर के शिव भक्त उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे। इनका कहना है - पिछले डेढ़ दो साल से केदारनाथ धाम की जो जाने का मार्ग सीढ़ी का वहां पत्थर खिसकने की घटना हुई है। कुछ महीने पहले भी दो-तीन पत्थर ऊपर से गिरे थे। जान माल की हानि को देखते हुए वहां अंदर जाने को मना किया गया है। लेकिन प्रत्येक त्यौहार पर वहां पंचायत द्वारा बड़ी टीवी स्क्रीन के माध्यम से दर्शन कराए जाते हैं। जिससे भक्तों को दिक्कत न हो। इसमें टेक्निकल टीम द्वारा लगातार जांच और कार्रवाई की जा रही है। जैसा भी ऊपर से निर्णय आएगा उस पर अमल होगा।-शिवानी पांडे, एसडीएम गुना - सीताराम नाटानी