राष्ट्रीय
25-Feb-2026


-तीसरी बार टिकट नहीं देने के नियम में फंस सकते हैं केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर पटना,(ईएमएस)। बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) प्रदेश की 5 सीटों के राज्यसभा चुनाव में दो सीट जीत सकती है और उसके दो ही सांसद अप्रैल में कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। एक राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और दूसरे केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर हैं। चर्चा है कि हरिवंश और रामनाथ ठाकुर में कोई एक ही वापस राज्यसभा लौटेगा, दूसरे को रिपीट करने का विचार नहीं है। नीतीश के मन-मिजाज और अति पिछड़ों की तरफ जेडीयू के राजनीतिक झुकाव को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रामनाथ ठाकुर के तीसरी बार राज्यसभा पहुंचाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को नीतीश कुमार ने दिल्ली की राजनीति में भेजने से पहले भी मौका दिया था। रामनाथ संसदीय राजनीति तक पहुंचने और केंद्र में मंत्री बनने से पहले बिहार सरकार में नीतीश कैबिनेट के मंत्री रहे हैं। 2014 में पहली बार राज्यसभा पहुंचे रामनाथ ठाकुर का यह दूसरा कार्यकाल है। कुछेक अपवाद को छोड़ दें तो नीतीश की जेडीयू का रिकॉर्ड है कि विधानमंडल और संसद के उच्च सदन यानी विधान परिषद और राज्यसभा में आम तौर पर पार्टी किसी नेता को तीसरी बार नहीं भेजती है। तीसरी बार टिकट नहीं देने के नियम से रामनाथ ठाकुर फंस सकते हैं, लेकिन अति पिछड़ी जातियों की राजनीति नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग का अहम हिस्सा रहा है। इस बात की संभावना है कि किंग महेंद्रा की तरह रामनाथ ठाकुर की स्पेशल केस के तौर पर लिए जाएं और तीसरी बार भेज दिए जाएं। रामनाथ ठाकुर के साथ नीतीश और पार्टी के सारे समीकरण पुराने जैसे हैं। जेडीयू के दूसरे सांसद हरिवंश नारायण सिंह भी तीसरी राज्यसभा पारी के लिए नीतीश की ओर देख रहे हैं। राज्यसभा के उपसभापति पद तक पहुंचने वाले जेडीयू के पहले नेता हरिवंश पुराने जमाने के बड़े पत्रकार हैं। पूर्व पीएम चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार रहे हरिवंश 2018 से दो कार्यकाल में करीब 7 साल से राज्यसभा के उपसभापति हैं। नीतीश से हरिवंश की केमिस्ट्री बिगड़ने के संकेत तभी मिलने लगे थे, जब नीतीश एनडीए को छोड़कर 2022 में दूसरी बार महागठबंधन के साथ चले गए थे। जेडीयू में नेताओं का एक धड़ा हरिवंश को जदयू से ज्यादा बीजेपी का वफादार मानता है। नीतीश जेडीयू कोटे की 2 सीटों में एक सीट पर रामनाथ ठाकुर को रिपीट करते हैं या हरिवंश को, ये तो अगले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा, लेकिन दूसरी सीट के संभावित कैंडिडेट के तौर पर मनीष वर्मा का नाम उभरा है। आरसीपी सिंह की ही तरह आईएएस अफसर रहे मनीष वर्मा भी नीतीश के भरोसेमंद करीबी हैं। मनीष जदयू के महासचिव हैं और पार्टी का जमीनी संचालन देखते हैं। कुछ लोग उन्हें नीतीश के उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखते हैं। नीतीश के दूसरे भरोसेमंद संजय झा पहले से राज्यसभा में हैं और इस समय पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। चर्चा है कि संजय झा को बीजेपी की सहमति से उपसभापति का पद और मनीष वर्मा को राज्यसभा में मौका मिल सकता है। सिराज/ईएमएस 25फरवरी26