क्षेत्रीय
25-Feb-2026
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जबलपुर, (ईएमएस)। म. प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा आयोजित ऑनलाइन जनसुनवाई में शहर के किसानों ने अपना पक्ष रखा। किसानों ने दो टूक कहा कि विद्युत सुविधाओं में शहरी एवं ग्रामीण जनों में भेदभाव विद्युत चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन हैं। किसानों ने इसे समाप्त किये जाने की भी मांग की। किसानों की समस्याओं के समाधान व उनकी आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्ता की विद्युत प्रदाय सुनिश्चित किये बिना विद्युत कम्पनी द्वारा प्रस्तावित विद्युत दर बढ़ोतरी के प्रस्ताव को सिरे से खारिज किये जाने का आयोग से अनुरोध किया गया। किसानों की ओर से किसानों के गैर राजनीतिक, वर्ग विहीन, राष्ट्रीय संगठन भारत कृषक समाज महाकौशल म.प्र. के अध्यक्ष इंजी. के के अग्रवाल ने 11 बिंदुओं की आपत्ति पर विस्तार से किसानों का पक्ष रखते हुए आयोग से कहा की आज भी ग्रामीण क्षेत्र में सूचारु विद्युत प्रदाय व्यवस्था का अभाव हैं। मैदानी अधिकारियों की उदासीनता व लापरवाही के चलते ग्रामीण जन अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। ट्रांसफार्मर, खम्भे, लाइन की हालत बद से बदतर हैं, वोल्टेज, ट्रिपिंग की समस्या व समय पर सुधार कार्य न होने से किसान बिजली का समुचित उपयोग नही कर पा रहे हैं। कृषि पम्पों के लिए सरकार के 10 घंटे के वायदे के इतर उन्हें अभी भी 5-6 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। कृषि पम्पों के हार्स पावर बढ़ा कर विद्युत बिलों में अचानक अप्रत्याशित बृद्धि, चोरी के फर्जी प्रकरण बनाये जाने तथा उन्हें कई प्रकार से प्रताड़ित व धमकाये जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी हैं। श्री अग्रवाल ने कहा कि विडंबना है की नियामक आयोग ने इन शिकायतों को कभी संज्ञान मे नहीं लिया, न ही कोई जाँच की और न हीं विद्युत कम्पनी पर कभी कोई कार्रवाई की, न ही कोई दिशा निर्देश जारी किये गए। नियामक आयोग अपने दायित्वों के निर्वहन मे पीछे क्यों रहा, यह समझ के परे है। ग्रामीण जन दोयम दर्जे का जीवन जीने मजबूर हैं। आयोग से आग्रह किया गया की वे मैदानी क्षेत्र मे विद्युत प्रदाय की स्थिति का आंकलन करने वरिष्ठ अधिकारियों को एक सप्ताह गांव मे रहने का आदेश जारी करें, जिससे दूध का दूध पानी का पानी स्पष्ट हो सके। ऐसे में विद्युत लॉस एवं कम्पनी द्वारा किये जा रहे अपव्यय के भार का ठीकरा उपभोक्ताओं पर थोपना कदापि न्यायोचित नहीं होगा। श्री अग्रवाल ने अन्य प्रांतों का हवाला देते हुए बताया की जब देश के कई प्रांतों में बिजली की दरें मध्यप्रदेश से कम हैं और वहां किसानों को दिन में उच्च गुणवत्ता की पर्याप्त बिजली दी जा सकती है, तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं। जबकी यहाँ सरप्लस में बिजली उपलब्ध हैं। आयोग के समक्ष किसानों की समस्याओं का प्रमाण सहित जोरदारी व विस्तार से प्रस्तुतीकरण कर आग्रह किया गया। कहा गया कि जब तक ग्रामीण क्षेत्र मे आवश्यकतानुसार, गुणवत्ता की बिजली प्रदाय तथा व्यवस्था मे सुधार व उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित नही किया जाता, तब तक विद्युत कम्पनी के दरों मे बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार न किया जाए तथा इसे सिरे से ख़ारिज किया जाए। आयोग के समक्ष किसान सेवा संगठन की ओर से जितेंद्र देसी द्वारा भी किसानों का पक्ष रखते हुए कहा गया की ग्रामीण भारत को प्राथमिकता दिये बिना देश समृद्ध नही होगा, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में मैदानी कर्मचारी व संसाधन बढ़ाने की मांग रखी। सुनील साहू / मोनिका / 25 फरवरी 2026