अंतर्राष्ट्रीय
26-Feb-2026
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बीजिंग (ईएमएस)। चाइनीज लोगों में रिटायरमेंट के बाद भी पढाई करने का चलन बढता जा रहा है। विदेशों में मनचाही पढाई पूरे करने के सपनों को लेकर चीनी लोग विदेशों का रुख कर रहे है। इस उम्र में उनके पास न सिर्फ पर्याप्त समय है, बल्कि अपनी रुचियों पर खर्च करने के लिए पर्याप्त धन भी मौजूद है। यही कारण है कि वे फैशन डिजाइन, प्रिंटमेकिंग, आभूषण निर्माण, फोटोग्राफी जैसे अपने पुराने शौक और पैशन को फिर से पढ़ाई के जरिए जी रहे हैं। पहले विदेश में पढ़ाई का सपना अधिकांश युवाओं तक सीमित था, लेकिन अब वरिष्ठ नागरिक भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इससे चीन की शिक्षा व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि अब उसे ऐसे कोर्स और सुविधाएं विकसित करनी होंगी जो उम्रदराज लोगों के लिए उपयुक्त हों। इसका एक उदाहरण 66 वर्षीय किउ लियानरु हैं, जिन्होंने इंग्लैंड स्थित बॉर्नमाउथ आर्ट्स यूनिवर्सिटी में एक शॉर्ट टर्म कोर्स में दाखिला लेकर साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। किउ ने यह पढ़ाई हॉस्टल में रहकर पूरी की, बिल्कुल वैसे ही जैसे जवान छात्र रहते हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई उन्हें भीतर से खुशी और संतोष देती है और वे रिटायरमेंट के बाद भी “अंदर और बाहर से चमकते रहना” चाहती हैं। हालाँकि किउ के लिए विदेश में पढ़ने का सपना पूरा करना आसान नहीं था। भाषा की बाधा और आवेदन प्रक्रिया को समझने में दिक्कत के चलते उन्होंने एक विदेशी शिक्षा कंसल्टेंसी की मदद ली। यह संस्था वरिष्ठ नागरिकों को छोटे समय के शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए विदेश भेजने का काम करती है। इसके सह-संस्थापक जी वेनली खुद भी 2024 में रिटायर हुए थे और उन्होंने बुजुर्गों के लिए एक विशेष क्लब बनाया है। उनके अनुसार पिछले एक साल में लगभग 300 वरिष्ठ नागरिक 2 से 4 सप्ताह के शॉर्ट टर्म कोर्स के लिए विदेश गए हैं। इन कोर्स की फीस 20,000 से 60,000 युआन (करीब 2.6 से 7.8 लाख रुपये) होती है और इसमें हवाई यात्रा शामिल नहीं होती। संस्था बड़े उम्र के छात्रों के लिए ट्रांसलेटर और शैक्षणिक सहायकों की भी व्यवस्था करती है। वरिष्ठ नागरिकों की विदेश में पढ़ाई को लेकर हुए एक लाइव-स्ट्रीम कार्यक्रम के बाद जी को 500 से अधिक संदेश मिले, जिसमें बुजुर्गों ने विभिन्न कोर्स की जानकारी माँगी। उनका कहना है कि रिटायरमेंट के बाद कई लोग खुद को समाज से अलग-थलग महसूस करते हैं और पढ़ाई उन्हें फिर से उद्देश्य का एहसास कराती है। खास बात यह है कि इस ट्रेंड में महिलाएं ज्यादा रुचि दिखा रही हैं। 85प्रतिशत से ज्यादा ग्राहक महिलाएं हैं, जिन्होंने जीवनभर परिवार के लिए त्याग किया और अब वे अपने लिए समय निकालना चाहती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह चलन चीन की “सीनियर इकोनॉमी” का बड़ा हिस्सा बनने वाला है, क्योंकि देश में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है। 2025 तक 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या 32 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जो कुल आबादी का लगभग 23 प्रतिशत है। 2035 तक यह संख्या 30प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतें और इच्छाएँ स्वाभाविक रूप से समाज और नीति निर्धारण पर प्रभाव डालेंगी। इसी बीच, चीन की शिक्षा व्यवस्था को भी अपनी दिशा बदलनी होगी। सुदामा/ईएमएस 26 फरवरी 2026