26-Feb-2026
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गठित समिति ने भविष्य के मिशनों के लिए सुधारात्मक उपायों की सिफारिश की नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को एनपीएस-02 अंतरिक्ष यान के ऑर्बिट-रेजिंग के दौरान आई तकनीकी खराबी की रिपोर्ट जारी की। इसरो द्वारा गठित शिखर समिति ने इस विफलता के कारणों की गहन जांच की है और भविष्य के मिशनों के लिए सुधारात्मक उपायों की सिफारिश भी की। बता दें 29 जनवरी, 2025 को जीएसएलवी-एफ15 के जरिए एनवीएस-02 उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया था। रॉकेट ने उपग्रह को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया था। उपग्रह के अलग होने के बाद सोलर पैनल भी तैनात हो गए थे, लेकिन जब इसे अंडाकार कक्षा से गोलाकार कक्षा में ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो इसमें बाधा आ गई। स्पेसक्राफ्ट यूटी पर लॉन्च व्हीकल से अलग हो गया, जिसके बाद सोलर पैनल लगाने और बिजली बनाने के लिए ओरिएंटेशन को स्थिर करने समेत कई ऑटोनॉमस एक्टिविटी की गईं। हालांकि, इसरो ने कहा कि एलिप्टिकल ऑर्बिट से सर्कुलर ऑर्बिट तक ऑर्बिट बढ़ाने का काम नहीं किया जा सका। इस गड़बड़ी के बाद ऑब्ज़र्वेशन की जांच करने और आगे की कार्रवाई की सलाह देने के लिए एक एपेक्स कमेटी बनाई गई। टेलीमेट्री और सिमुलेशन स्टडी के आधार पर कमेटी ने इस समस्या के पीछे के टेक्निकल कारण की पहचान की। नतीजों की जानकारी देते हुए इसरो ने कहा कि एपेक्स कमेटी ने सिमुलेशन डेटा के पूरी तरह से एनालिसिस के बाद यह नतीजा निकाला कि गड़बड़ी का मुख्य कारण ड्राइव सिग्नल इंजन की ऑक्सीडाइज़र लाइन के पायरो वाल्व तक नहीं पहुंचा, जिसका मकसद ऑर्बिट बढ़ाना था। रिपोर्ट के मुताबिक कमेटी ने यह भी पता लगाया कि सबसे संभावित कारण मेन और रिडंडेंट कनेक्टर पाथ दोनों में कम से कम एक कॉन्टैक्ट का अलग होना था। इसरो ने कहा कि कमेटी ने भविष्य के मिशनों में पायरो सिस्टम ऑपरेशन की रिडंडेंसी और भरोसेमंदता बढ़ाने के उपायों की सिफारिश की है। ये सुधार के काम 2 नवंबर, 2025 को एलवीएम-3 एम5 से लॉन्च किए गए सीएमएस-03 स्पेसक्राफ्ट में किए गए, जहां पायरो सिस्टम ने अच्छा काम किया और सैटेलाइट को तय ऑर्बिट में पहुंचा दिया। इसरो ने कहा कि आगे के सभी मिशनों में, जहां लागू होगा, इन सुझावों का पालन किया जाएगा। सिराज/ईएमएस 26फरवरी26 ---------------------------------