26-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा को लेकर एक ऐसे रक्षा सौदे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसका संबेध गोल्डन होराइजन से है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इजरायल भारत को अपनी उन्नत एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल ‘गोल्डन होराइजन’ देने पर विचार कर रहा है। ऐसे में गोल्डन होराइजन की खूबियों पर भी नजर दौड़ाई जा रही है। जानकारी अनुसार ‘गोल्डन होराइजन’ को लड़ाकू विमानों, विशेषकर सुखोई एसयू-30एमकेआई जैसे प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मिसाइल टर्मिनल फेज में मैक-5 से अधिक गति हासिल कर सकती है, जिससे इसे रोकना अत्यंत कठिन माना जा रहा है। तुलना में भारत-रूस संयुक्त उद्यम की ब्रह्मोस मिसाइल मैक-3 के आसपास की रफ्तार से उड़ान भरती है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि प्रस्तावित मिसाइल की संभावित रेंज 1,000 से 2,000 किलोमीटर के बीच हो सकती है, जो ब्रह्मोस की लगभग 800 किलोमीटर तक की रेंज से अधिक है। अब जबकि भारत और इजराइल के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। इजराइल की संसद ‘नेसेट’ में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच भरोसेमंद रक्षा साझेदारी को वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में आवश्यक बताया। मौजूदा चर्चाओं को इसी रणनीतिक साझेदारी के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह सौदा होता है तो भारत की लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, विशेषकर गहरे बंकरों और सुदृढ़ सैन्य ठिकानों जैसे ‘हार्ड टारगेट्स’ के खिलाफ। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। भारत पहले से ही बहु-स्तरीय वायु एवं मिसाइल रक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें रूस से प्राप्त एस-400 प्रणाली, इजरायली ‘बराक’ सिस्टम और स्वदेशी ‘आकाश’ मिसाइल प्रणाली शामिल हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि नई तकनीक शामिल होती है तो यह भारत की 15,000 किलोमीटर से अधिक लंबी स्थलीय सीमा और विस्तृत समुद्री तटरेखा की सुरक्षा क्षमता को और सुदृढ़ कर सकती है। हालांकि, संभावित सौदे और कथित ‘हेक्सागन ऑफ एलायंसेज’ जैसी नई सुरक्षा संरचना को लेकर आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है। हिदायत/ईएमएस 26फरवरी26