नई दिल्ली,(ईएमएस)। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान को 72 घंटे तक चली जंग में करारी मात दी। लेकिन इस जंग में भारत को भी काफी कुछ सीखने को मिला था। जंग में पाकिस्तान ने जिस तरह से भारत के खिलाफ चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया, उससे भारत की चिंता बढ़ना लाजिमी है। आंतकी पाकिस्तान ने चीनी हथियारों से भारत के सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की। हालांकि भारत के मजूबत सुरक्षा तंत्र ने उसके सभी प्रयाय आसमान में भी बेकार कर दिए। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत को एक बड़ी सीख मिली, भविष्य में पाकिस्तान और चीन को अलग-अलग कर नहीं देखा जाना चाहिए।वर्तमान में पाकिस्तान चीन का पूरी तरह पिछलग्गू देश बन चुका है। चीन के लिए भी पाकिस्तान एक बड़ा बाजार बना है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारतीय इलाके पर चीनी बीवीआर मिसाइलें पीएल-15 का इस्तेमाल किया था। भारतीय क्षेत्र में मिसाइल के मलबे मिले थे। पीएल-15 बेहद आधुनिक बीवीआर मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज करीब 250 किमी है। इन मिसाइलों को फाइटर जेट्स से दागा जाता है और ये नजर आने से पहले ही लक्ष्य को भेद देती है। सैन्य जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान ने चीनी के 4.5 जेन के फाइटर जेट जे-17 से इन मिसाइलों को फायर किया होगा। दरअसल, आज हम पीएल-15 की बात कर रहे हैं। भारत के पास पीएल-15 के मुकाबले के लिए देशी अस्त्र मार्क-1 मिसाइलें हैं। ये बीवीआर श्रेणी की शानदार मिसाइलें हैं, लेकिन, मौजूदा वक्त में इनकी रेंज थोड़ी कम है। अस्त्र मार्क-1 की रेंज करीब 160 किमी है। इसके साथ ही डीआरडीओ एईएसए रडार और डूअल पल्स मोटर टेक्नोलॉजी से लैस कर रहा है। साथ ही भारत अस्त्र मार्क-2 पर भी काम कर रहा है। इसके अलावा अस्त्र मार्क-3 पर भी काम चल रहा है। लेकिन, पीएम-15 के मुकाबले अभी भी ये तकनीकी रूप से थोड़ा पीछे हैं। भारत फ्रांस से खरीदे गए राफेल विमानों में मेटियोर मिसाइलों का इस्तेमाल करता है। ये भी बीवीआर मिसाइलें हैं। इसमें रैमजेट इंजल लगे होते हैं, जिससे ये मिसाइले बेहद हाईस्पीड से वार करती हैं। बावजूद इसके चीन के पीएल-15 और उसके भविष्य के और एडवांस वैरिएंट को तकनीकी रूप से थोड़ी बढ़त हासिल है। इसके बाद भारत अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस के साथ भी आर-37एम बीवीआर मिसाइलों को लेकर बातचीत कर रहा है। ये मिसाइलें 300 किमी तक मार कर सकती हैं। ये वार-टेस्टेड मिसाइलें हैं और ये हर एक मामले में चीनी पीएल-15 और उसके एडवांस वर्जन पीएल-17 को टक्कर देने में सक्षम हैं। लेकिन, इतना सब होने के बावजूद भारत किसी एक पर निर्भर नहीं रहना चाहता। भारत के पास अपना देसी बीवीआर अस्त्र सीरीज की मिसाइलें हैं। उसके पास राफेल के लिए मेटियोर मिसाइलें है। रूसी आर-37एम को लेकर चर्चा जारी है। लेकिन, वह एक और सिस्टम की तलाश में है जो और भी एडवांस होगा। यह तलाश इजरायली बीवीआर मिसाइल के साथ पूरी होती है। इजरायल के ये बीवीआर मिसाइलें एआई इनेबल्ड हैं। यह 6वीं जेन की मिसाइलें हैं। यानी दुनिया में अभी इसके टक्कर की बीवीआर मिसाइलें नहीं हैं। ये बेहद हल्क और लंबी दूरी तक वार करने में सक्षम हैं। भारत इन मिसाइलों को अपने देशी हल्के तेजस फाइटर जेट्स में लगाना चाहता है। इसका नाम स्काई स्टिंग है। इन्हें इजरायल की सरकारी कंपनी राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स तैयार कर रही है। राफेल एडवांस सिस्टम ने इस स्काई स्टिंग को इसतरह से डिजाइन किया है जिससे कि वह किसी भी पश्चिमी फाइटर जेट्स के साथ आसानी से लिंक किया जा सके। इसमें अमेरिका की सबसे एडवांस फिफ्थ जेन फाइटर जेट एफ-35 भी शामिल है। हालांकि एफ-35 में इस मिसाइल को इंटीग्रेट करने के लिए जेट की निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन से अनुमति लेनी होगी। आशीष/ईएमएस 27 फरवरी 2026