27-Feb-2026


जयपुर (ईएमएस)। जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने शुक्रवार को विधान सभा में कहा कि परवन वृहद परियोजना कोटा, झालावाड़ और बारां जिलों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। हाड़ौती अंचल के लिए यह जीवनदायिनी बनेगी। इसके कार्यों को गुणवत्ता से पूरा कराने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में परियोजना में अनियमितताएं सामने आई, जिनसे कार्यों में देरी हुई है। रावत ने सदन में आश्वस्त किया है कि परियोजना की अनियमितताओं के प्रकरणों का परीक्षण कराकर कार्यवाही की जाएगी। इसमें संवेदक दोषी पाए जाते हैं तो वसूली करेंगे। विभागीय अधिकारी लिप्त होंगे तो उनके विरूद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत पूर्ववर्ती सरकार के दौरान 15 में से 1 भी गेट नहीं लगाया गया था, जबकि हमारी सरकार ने दो वर्ष में ही 14 गेट लगा दिए हैं। एक गेट भी इस वित्तीय वर्ष में लगा दिया जाएगा। जल संसाधन मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य श्री प्रमोद जैन ‘भाया‘ द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने परवन परियोजना के कार्य में आई बाधाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से 2017 के बीच केन्द्रीय जल आयोग, वन एवं पर्यावरण की अंतिम स्वीकृति प्राप्त की जाकर एवं निविदा आमंत्रित करते हुए बांध एवं टनल का कार्यादेश जारी कर दिसम्बर 2017 से कार्य शुरू किया गया था। रावत ने बताया कि बांध की नींव की रॉक में फाल्ट लाइन आने से इसकी जांच एवं सुधारात्मक उपायों के कारण के साथ सीडब्ल्यूसी से अनुमोदन में लगभग 27 माह की देरी हुई। बांध स्थल पर नदी में 2 पहाडिय़ों के बीच डायवर्जन के लिए स्थल ना होने के कारण वर्षाकाल बाद भी लम्बे समय तक जल प्रवाह रहना एवं बांध स्थल के नीचे स्थित शेरगढ़ पिकअप वीयर के बैक वाटर से बांध निर्माण कार्य प्रभावित रहा। उन्होंने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में सुधार एवं नहरें एवं डूब क्षेत्र की भूमि अवाप्ति प्रक्रिया पूर्ण करने में 2 से 3 वर्ष का समय लगा। अनेक मामलों में विभिन्न न्यायिक प्रकरणों के निस्तारण, कोविड के प्रतिबंधों से कार्य प्रभावित रहे। साथ ही, खेतों में फसल होने के कारण पाइप लाइन बिछाने तथा नहर कार्य के लिए फरवरी से जून तक का सीमित समय ही मिला। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में तत्कालीन राज्य सरकार के समय परवन परियोजना की गति कई कारणों से बाधित रही। तत्कालीन विधायक श्री पानाचंद मेघवाल की शिकायत पर तत्कालीन मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं अधिशाषी अभियंता को 27 अक्टूबर, 2021 में निलम्बित किया गया था। उन्होंने कहा कि शिकायत में राइजिंग मैन में डीआई पाइप के स्थान पर एचडीपीई पाइप का इस्तेमाल, गलत डिजाइन एवं एचडीपीई पाइप के अनुचित मानकों के उपयोग के क्रम में आरोप लगाए गए थे। इस पर वित्त विभाग की ओर से अक्टूबर, 2021 में विशेष जांच दल गठित किया गया था, जिसमें भी परियोजना में अनियमितताएं सामने आई। उन्होंने बताया कि तत्कालीन सरकार ने स्वयं के द्वारा निलम्बित किए गए अधिकारियों को 12 जनवरी, 2022 को बहाल कर दिया गया था। इस तरह से कार्य को कई माह तक बंद रखा गया और फिर से 31 मार्च, 2022 को पुन: शुरू भी कराया गया। अशोक शर्मा/ 5:30 बजे/27 फरवरी 2026