28-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आधुनिक जीवनशैली और बाजार की मांग के बीच पारंपरिक जड़ी-बूटियों को वैज्ञानिक नामों के साथ नए सिरे से पेश किया जा रहा है। ऐसी ही एक औषधीय जड़ी है लेमन ग्रास, हालांकि लेमन ग्रास का उपयोग कोई नया चलन नहीं, बल्कि आयुर्वेद में यह प्राचीन काल से ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आयुर्वेद में लेमन ग्रास को ‘भूस्तृण’ के नाम से जाना जाता है और इसे वात, पित्त तथा कफ दोषों को संतुलित करने वाली उपयोगी औषधि माना गया है। औषधीय गुणों से भरपूर यह घास जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में राहत पहुंचाती है। इसका स्वाद हल्का कड़वा और तीखा होता है, जबकि इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है। लेमन ग्रास का नियमित सेवन नसों को शांत करने, तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाने और मस्तिष्क व शरीर के बीच संकेतों को बेहतर करने में मदद करता है। लेमन ग्रास कई बीमारियों में लाभकारी बताया गया है। आयुर्वेद में इसका उपयोग खांसी, बुखार, तपेदिक, कुष्ठ रोग, फाइलेरिया, मलेरिया, आंखों की सूजन, मसूड़ों की सूजन और रक्त की अशुद्धि से संबंधित विकारों में किया जाता रहा है। लेमन ग्रास का तेल पाचन क्रिया सुधारने, मतली, सिरदर्द और मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में भी राहत देता है। त्वचा संबंधी रोगों में इसका लेप दवा की तरह असर दिखाता है और सूजन एवं संक्रमण को कम करता है। लेमन ग्रास को अपने दैनिक जीवन में कई तरीकों से शामिल किया जा सकता है। इसका ताज़ा जूस शरीर को डिटॉक्स करने में कारगर माना जाता है और ऊर्जा प्रदान करता है। जूस के स्थान पर इसकी चाय भी एक लोकप्रिय विकल्प है, जिसे कई लोग कैफीन के स्वस्थ विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेमन ग्रास टी न केवल स्वाद में बेहतर है, बल्कि मन को शांत करने और ताजगी देने का भी काम करती है। तनाव और नींद की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए लेमन ग्रास का तेल बेहद लाभकारी माना गया है। इसे माथे या चेहरे पर हल्की मसाज के साथ लगाने से तनाव कम होता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है। सुदामा/ईएमएस 28 फरवरी 2026