राष्ट्रीय
28-Feb-2026


केंद्र पहले ही कह चुका किसी भी मस्जिद को नहीं हटाया जाएगा नई दिल्ली (ईएमएस)। संसद भवन से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर कृषि भवन परिसर में स्थित 114 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को लेकर फिर विवाद खड़ा हो गया है। यह मस्जिद राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैले तीन किलोमीटर लंबे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट क्षेत्र में अर्तगंत आती है, जिसके पुनर्विकास कार्य जारी हैं। कदीमी मस्जिद वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है। हाई सुरक्षा जोन में होने के कारण आम लोगों की आवाजाही यहां प्रतिबंधित है और मुख्यतः सरकारी कर्मचारी ही यहां नमाज अदा करते हैं। मस्जिद के संभावित हटाए जाने की आशंकाओं के बीच केंद्र पहले यह स्पष्ट कर चुकी है कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत किसी भी मस्जिद को नहीं हटाया जाएगा। हालांकि वक्फ बोर्ड से जुड़े कुछ लोग आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। वक्फ बोर्ड की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मशरूर खान का कहना है कि अब तक मस्जिद को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन पूर्व में तीन मजारों और एक मस्जिद को हटाए जाने की घटनाओं के चलते आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कदीमी मस्जिद के दस्तावेज जुटा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर अदालत का रुख कर सके। वकील खान के अनुसार, 1912 में ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियन द्वारा तैयार किए गए दिल्ली के नक्शे में भी मस्जिद का उल्लेख मिलता है। उनका दावा है कि जब लुटियन दिल्ली का डिजाइन बना रहे थे, तब यह मस्जिद पहले से मौजूद थी और उन्होंने इस बिना छेड़े शहरी योजना तैयार की गई। वक्फ पक्ष का कहना है कि मस्जिद के हेरिटेज होने के सबूतों में 1912 का नक्शा, वक्फ बोर्ड का रिकॉर्ड, ऐतिहासिक पुस्तकों में उल्लेख और 1970 का गजट नोटिफिकेशन शामिल हैं। गजट नोटिफिकेशन सरकारी दस्तावेज होता है, जो वक्फ संपत्तियों के सर्वे के बाद जारी किया जाता है। इससे पहले उद्योग भवन क्षेत्र के गोलचक्कर पर स्थित तीन मजारों को हटाए जाने का भी जिक्र किया जा रहा है, जिससे चिंता और बढ़ी है। फिलहाल सरकार की ओर से कदीमी मस्जिद को हटाने संबंधी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में स्थिति स्पष्ट होने तक यह मुद्दा कानूनी और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है। आशीष दुबे / 28 फरवरी 2026