राष्ट्रीय
28-Feb-2026


2 से 3 वर्षों तक गोदामों में रखने के कारण गुणवत्ता पर असर नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाय) के तहत वितरित हो रहे फोर्टिफाइड चावल पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह निर्णय लंबे समय तक भंडारण के दौरान चावल में मिलाए गए सूक्ष्म पोषक तत्वों की गुणवत्ता घटने की आशंकाओं के कारण लिया है। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, इस संबंध में विस्तृत अध्ययन के लिए आईआईटी खड़गपुर को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। संस्थान ने अलग-अलग मौसम, तापमान, नमी और भंडारण की परिस्थितियों में फोर्टिफाइड चावल की गुणवत्ता का परीक्षण किया। रिपोर्ट में सामने आया कि लंबे समय तक गोदामों में रखने पर चावल में मिलाए गए आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्वों की मात्रा में कमी आ रही है, जिससे इस योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। भारत में सरकारी गोदामों में चावल का भंडारण आवश्यकता से अधिक है। केंद्रीय पूल में लगभग 674 लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध है, जबकि सालाना जरूरत करीब 372 लाख मीट्रिक टन की ही है। इस अतिरिक्त भंडारण के कारण चावल को 2 से 3 वर्षों तक गोदामों में रखा जाता है। इतनी लंबी अवधि में तापमान और नमी के प्रभाव से पोषक तत्वों की शक्ति कम हो जाती है। यही भंडारण समस्या सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, जिसके चलते यह अस्थायी निर्णय लिया गया है। मोदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से राशन कार्ड धारकों को मिलने वाले अनाज की मात्रा में कोई कटौती नहीं होगी। लाभार्थियों को पूरा चावल मिलता रहेगा, लेकिन वह अब फोर्टिफाइड की जगह सामान्य चावल होगा। यह निर्णय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), आंगनवाड़ी सेवाओं (आईसीडीएस) और स्कूलों में संचालित पीएम पोषण (मिड-डे मील) जैसी योजनाओं पर लागू होगा। हालांकि, खरीफ सीजन 2025-26 के लिए राज्यों को यह छूट दी गई है कि वे अपनी परिस्थितियों के अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल का वितरण कर सकते हैं। आशीष दुबे / 28 फरवरी 2026