मुंबई (ईएमएस)। बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्देशक मनमोहन देसाई और महानायक अमिताभ बच्चन की जोड़ी प्रतिष्ठित जोड़ी मानी जाती है। बॉलीवुड की इस जोडी ने 70 और 80 के दशक में कई ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। दोनों के बीच का रिश्ता महज निर्देशक और अभिनेता का नहीं था, बल्कि दोस्ती, भरोसे और सम्मान की नींव पर खड़ा एक मजबूत संबंध भी था। कहानी की शुरुआत 1977 की सुपरहिट फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ से होती है, जो अमिताभ बच्चन और मनमोहन देसाई की पहली फिल्म थी। इस फिल्म की सफलता पार्टी में देसाई ने अमिताभ से एक भावुक बात कही थी “तुम मुझे छोड़कर चले जाओ तो पता नहीं, लेकिन मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला।” यह वाक्य दोनों के रिश्ते की गहराई और भरोसे का प्रतीक बन गया, जिसे देसाई ने अपने जीवन के अंतिम दिनों तक निभाया। 26 फरवरी 1937 को मुंबई में जन्मे मनमोहन देसाई ने अपने करियर की शुरुआत एक असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में की थी। धीरे-धीरे उन्होंने दर्शकों की पसंद को समझा और उसी आधार पर मनोरंजन से भरपूर फिल्में बनाने का सिलसिला शुरू किया। 70 और 80 के दशक में उन्होंने ‘धरम वीर’, ‘चाचा भतीजा’, ‘परवरिश’ और ‘अमर अकबर एंथनी’ जैसी कई मेगा हिट फिल्में दीं, जिन्होंने उन्हें मास एंटरटेनमेंट का बादशाह बना दिया। देसाई की ज्यादातर फिल्मों में अमिताभ बच्चन मुख्य किरदार निभाते थे। दोनों ने मिलकर ‘सुहाग’, ‘नसीब’, ‘देश प्रेमी’, ‘कुली’, ‘मर्द’ और ‘गंगा जमुना सरस्वती’ जैसी फिल्मों में काम किया, जिनमें से लगभग सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं। मनमोहन देसाई एक इंटरव्यू में कह चुके थे कि अमिताभ उनकी फिल्मों की आत्मा हैं। वहीं अमिताभ ने भी कई मौकों पर कहा कि उनके करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में देसाई की अहम भूमिका रही। 1 मार्च 1994 को मनमोहन देसाई का निधन बालकनी से गिरने के कारण हो गया। सुदामा/ईएमएस 01 मार्च 2026