मुंबई (ईएमएस)। सोशल मीडिया पर बॉलीवुड के दिग्गज फिल्मकार सुभाष घई ने एक विशेष पोस्ट के माध्यम से अपने काम को लेकर गहरी बात कही। उन्होंने पोस्ट में अपनी कई प्रसिद्ध फिल्मों के शीर्षक राम-लखन, सौदागर, खलनायक, नायक, परदेस और ताल के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में किसी भी व्यक्ति की पहचान उसकी बातों से नहीं, बल्कि उसके काम से होगी। उनका मानना है कि ऐसा काम करो जो खुद बोले, जिसके लिए व्यक्ति की उपस्थिति भी जरूरी न पड़े। सुभाष घई ने लिखते हुए जोर दिया कि किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता ही पहचान बनाती है, इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे अपने काम को इतना बेहतर बनाएं कि वह दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाए। उन्होंने कहा कि दर्शक हमेशा फिल्म को याद रखते हैं, फिल्म बनाने वाले को नहीं। इसलिए किसी भी फिल्मकार या क्रिएटर की कोशिश यही होनी चाहिए कि वह निरंतर सीखता रहे और अपनी कला को बेहतर बनाता रहे। उनकी नज़र में सफलता का सबसे बड़ा रास्ता सीखते रहने और समय के साथ खुद को विकसित करने में है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि नई तकनीकों से डरने के बजाय उन्हें अपनाना चाहिए। खासतौर पर एआई को उन्होंने एक “तीसरी आंख” बताया, जो नई सोच, नए विचार और नई दिशाओं को देखने में मदद कर सकती है। उनकी राय में एआई को दुश्मन नहीं, बल्कि एक सहायक टूल के रूप में देखना चाहिए, जो क्रिएटिविटी को और मजबूत बनाता है। सिनेमा में शानदार योगदान देने वाले सुभाष घई की कई फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में जगह बनाए हुए हैं। उनका संदेश साफ है, लगातार सीखो, विकसित हो और ऐसा काम करो, जो आने वाले समय में खुद तुम्हारी पहचान बन जाए। हालांकि लंबे समय से उनकी कोई नई फिल्म बड़े पर्दे पर नहीं आई है, लेकिन वे पूरी तरह सक्रिय हैं और अपने प्रतिष्ठित फिल्म शिक्षण संस्थान व्हीस्टलिंग वूडस इंटरनेशनल पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यहां उन्होंने कई नई प्रतिभाओं को दिशा दी है और इंडस्ट्री को योग्य कलाकार दिए हैं। सुदामा/ईएमएस 01 मार्च 2026