क्षेत्रीय
01-Mar-2026
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मछली माफिया पर कार्रवाई या महज औपचारिकता? 3.50 क्विंटल सूखी मछली जब्त, 14 हजार में नीलामी पर उठे सवाल अशोकनगर (ईएमएस)। जिले में प्रतिबंधित छोटी मछलियों को पकड़कर सुखाने और बेचने का खेल लगातार जारी है। ताजा मामला ग्राम हेमराज बरखेड़ा के पास स्थित जमा खेड़ी सिंचाई तालाब का सामने आया है, जहां बड़ी मात्रा में मछलियां तालाब किनारे खुलेआम सुखाई जा रही थीं। तेज बदबू के कारण आसपास से गुजरने वाले लोग परेशान हो गए। समाचार प्रतिनिधि ने इसकी शिकायत प्रशासन से की, जिसके लगभग तीन घंटे बाद मत्स्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान मत्स्य विभाग अधिकारी एन.एस. दंडोतिया के नेतृत्व में पहुंची टीम ने करीब 3.50 क्विंटल (लगभग 350 किलोग्राम) सूखी मछली जब्त की। साथ ही मछली पकड़ने में उपयोग किए जा रहे 20 नग जाल के चट्टे, जल तथा दो चद्दर की नाव भी जब्त कर थाने में जमा कराई गई। मौके पर कुछ मजदूर मिले, जो बिहार जिले के निवासी बताए गए। उनके आधार कार्ड की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, मौके पर कोई मुख्य संचालक या ठेकेदार मौजूद नहीं था, केवल मजदूर ही कार्य करते पाए गए। हालांकि कार्रवाई के बाद जब्त मछली की नीलामी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, लगभग 3.50 क्विंटल सूखी मछली की नीलामी मात्र 14 हजार रुपए में कर दी गई। जबकि लोगों का दावा है कि गोरखपुर मंडी में सूखी मछली 40 से 45 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिकती है। इस हिसाब से जब्त मछली की कीमत एक लाख रुपए से अधिक हो सकती थी। ऐसे में 14 हजार रुपए में नीलामी होने पर पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि जिस व्यक्ति को मछली की नीलामी दी गई, वह कथित रूप से मछली कारोबार से जुड़ा हुआ है और मुख्य मछली माफिया का परिचित बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति पर अवैध गतिविधि का संदेह है, उसी के परिचित परिवार के सदस्य को नीलामी देकर मामले को दबाने का प्रयास किया गया है। आरोप यह भी है कि मुख्य संचालक का नाम तक सामने नहीं लाया गया। इस मामले में मत्स्य विभाग के अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने ने सफाई देते हुए कहा कि जब्त की गई मछली गीली थी और उससे बदबू आ रही थी। उनके अनुसार, मौके पर मौजूद किसी भी ग्रामीण को नीलामी में भाग लेने का अवसर दिया गया था, लेकिन अधिक बोली नहीं लगाई गई, इसलिए 14 हजार रुपए में नीलामी की गई। अधिकारी का कहना है कि नीलामी की पूरी राशि विभागीय खाते में जमा की जाएगी। मत्स्य विभाग अधिकारी एन.एस. दंडोतिया ने बताया कि जब्त की गई सूखी मछली की अनुमानित कीमत गोरखपुर मंडी में करीब 15 से 20 हजार रुपए तक हो सकती है। उन्होंने कहा कि जिले में प्रतिबंधित छोटी मछलियों को पकड़कर सुखाने और बेचने पर रोक है, इसके बावजूद कुछ लोग नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है और आगे भी सख्ती जारी रहेगी। लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। जिले के मौला डैम, छज्जू बरखेड़ा तालाब सहित कई अन्य स्थानों पर भी छोटी मछलियों को पकड़कर सुखाने का काम खुलेआम किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी केवल शिकायत मिलने पर औपचारिक कार्रवाई करते हैं, जबकि नियमित निरीक्षण और सख्ती से इस अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। प्रतिबंधित मछलियों के अंधाधुंध दोहन से जल संसाधनों को गंभीर नुकसान हो रहा है। छोटी मछलियों को पकड़कर सुखाने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और मत्स्य संपदा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इससे भविष्य में तालाबों की उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। संयुक्त टीम द्वारा संबंधित थाने में प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस कार्रवाई से वास्तव में जिले में प्रतिबंधित मछली सुखाने के गोरखधंधे पर रोक लगेगी, या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगी? ईएमएस / 01/03/2026