राष्ट्रीय
02-Mar-2026
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असम से बंगाल, तमिलनाडु से केरल तक एनडीए, इंडिया ब्लॉक, वामदल और क्षेत्रीय दलों के सामने कड़ी परीक्षा नई दिल्ली,(ईएमएस)। साल 2026 में विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव भारतीय राजनीति के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। जहां एक ओर भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए अपने सियासी विस्तार की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस की अगुवाई वाला इंडिया ब्लॉक अस्तित्व और प्रभाव की लड़ाई लड़ रहा है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव इस साल की सियासी दिशा तय करेंगे। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती असम में सत्ता बरकरार रखने की है। वहां कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई के नेतृत्व में मुकाबला कड़ा होने की संभावना है। पुडुचेरी में एनडीए समर्थित सरकार को दोहराना भी आसान नहीं दिख रहा। वहीं भाजपा की नजर दक्षिण भारत पर है। केरल और तमिलनाडु में पार्टी अभी भी तीसरे विकल्प के तौर पर जूझ रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में खाता न खुलना पार्टी के लिए संकेत रहा है कि गठबंधन रणनीति मजबूत करनी होगी। पश्चिम बंगाल में भाजपा लंबे समय से सत्ता परिवर्तन की कोशिश में है, लेकिन ममता बनर्जी की मजबूत पकड़ उसके रास्ते की बड़ी बाधा है। बांग्लादेशी घुसपैठ और पहचान की राजनीति जैसे मुद्दों पर भाजपा माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, मगर बंगाल अस्मिता का सवाल चुनावी समीकरण बदल सकता है। कांग्रेस: पटरी पर लौटने की चुनौती कांग्रेस के लिए 2026 अस्तित्व की परीक्षा जैसा है। पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में वह केवल तमिलनाडु में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है, जहां एम. के. स्टालिन के नेतृत्व में द्रविड़ मुनेत्र कषगम मजबूत स्थिति में है। असम और केरल कांग्रेस के लिए अहम हैं। केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ और वामपंथी एलडीएफ के बीच सीधा मुकाबला है। प्रदेश नेतृत्व और गुटबाजी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। असम में पार्टी वापसी की उम्मीद लगाए हुए है, जबकि बंगाल में वह हाशिए पर है। वामदल और क्षेत्रीय दल वामपंथी दलों के लिए केरल आखिरी बड़ा गढ़ बचा है। यदि यहां से भी सत्ता हाथ से निकलती है तो उनका राष्ट्रीय प्रभाव और सिमट सकता है। तमिलनाडु में एआईएडीएमके के कमजोर संगठनात्मक हालात अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के लिए चुनौती बने हुए हैं, जिससे डीएमके को बढ़त मिलती दिख रही है। किसके लिए कैसा भविष्य? 2026 के चुनाव सिर्फ राज्यों की सत्ता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की धुरी तय करेंगे। भाजपा के लिए दक्षिण में पैर जमाना और असम बचाना अहम है, तो कांग्रेस के लिए केरल और असम में प्रदर्शन जीवनरेखा साबित हो सकता है। ममता बनर्जी, वामदल और दक्षिण के क्षेत्रीय दल भी अपनी-अपनी सियासी जमीन बचाने की जद्दोजहद में होंगे। अब देखना यह है कि 2026 में कौन सी पार्टी अपनी चुनौतियों को अवसर में बदल पाती है और किसके लिए यह साल सियासी झटका साबित होता है। हिदायत/ईएमएस 02 मार्च 2026