-ब्रिटिश एयरबेस को निशाना बनाए जाने से यूरोप में बढ़ी चिंता, फ्रांस ने साइप्रस को एंटी-ड्रोन सिस्टम देने का किया ऐलान पेरिस,(ईएमएस)। पूर्वी भूमध्यसागर में तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान से जुड़े ड्रोन हमले की खबरों ने यूरोप को सतर्क होने का संकेत दे दिया। लगभग 2000 किलोमीटर दूर स्थित द्वीपीय देश साइप्रस के दक्षिणी तट पर मौजूद ब्रिटिश एयरबेस को निशाना बनाए जाने का दावा किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस हमले में ईरान में निर्मित ‘शाहेद’ ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साइप्रस, जो यूरोपीय संघ का सदस्य है, ने स्पष्ट किया है कि वह मौजूदा संघर्ष में किसी भी पक्ष के साथ शामिल नहीं है। इसके बावजूद उसके क्षेत्र में स्थित ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है। दक्षिणी साइप्रस में स्थित रॉयल एयर फोर्स का अक्रोटिरी एयरबेस मध्य-पूर्व में ब्रिटिश अभियानों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला सीधे साइप्रस पर नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल के सहयोगियों को संदेश देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ब्रिटेन नाटो का प्रमुख सदस्य है। ऐसे में उसके सैन्य ठिकाने पर हमला नाटो की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में गंभीर माना जा रहा है। घटनाक्रम के बाद फ्रांस ने भी सक्रियता दिखाई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साइप्रस को एंटी-ड्रोन और एंटी-मिसाइल रक्षा प्रणाली उपलब्ध कराने की घोषणा की है। साथ ही एक युद्धपोत भेजने का भी वादा किया गया है, जिससे साइप्रस की सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया जा सके। हिदायत/ईएमएस 03मार्च26