इन्दौर (ईएमएस) साइबर ठगोरो और साइबर ठगी के मामले में पुलिस कार्रवाई में परेशान अन्य लोगों को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर के जस्टिस प्रणय वर्मा ने एक याचिका सुनवाई दौरान बड़ी राहत देने वाला आदेश जारी किया है। जिसके चलते अब साइबर अपराधों की जांच के नाम पर आम जनता और व्यापारियों के बैंक खातों को पूरी तरह बंद (फ्रीज) करने वाली पुलिसिया कार्रवाई पर रोक लग जाएगी। कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बैंक और पुलिस किसी भी स्थिति में खाताधारक का पूरा खाता ब्लॉक नहीं कर सकते। केवल संदिग्ध राशि पर रोक लगाई जा सकेगी और वह भी केवल तीन महीने के लिए खाता धारक बाकी पैसों का इस्तेमाल कर सकेगा तीन महीने बाद रोकी गई राशि भी उपयोग की जा सकेगी वहीं पुलिस और बैंक द्वारा रोक अगर तीन महीने बाद भी रोक को जारी रखना जरूरी है तो सक्षम न्यायालय से आदेश करवाना जरूरी होगा। क्या है पूरा मामला - यह आदेश जस्टिस प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने प्रतीक जैन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता का कोटक महिंद्रा बैंक में खाता था, जिसे साइबर सेल के एक निर्देश के बाद बैंक ने पूरी तरह फ्रीज कर दिया था। हैरानी की बात यह थी कि खाते में विवादित राशि मात्र रूपए 2,899/- थी, लेकिन बैंक ने लाखों रुपये के लेनदेन वाले पूरे खाते के संचालन पर रोक लगा दी थी। कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें - • केवल संदिग्ध राशि पर रोक:- कोर्ट ने आदेश दिया कि बैंक केवल उस राशि को होल्ड पर रखें जिसकी शिकायत हुई है। शेष राशि पर खाताधारक का पूरा अधिकार होगा। • विवादित राशि की FD:- बनेगी: संदिग्ध राशि को बैंक द्वारा एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में तब्दील किया जाएगा ताकि जांच पूरी होने तक वह सुरक्षित रहे। • 90 दिनों की डेडलाइन:- जांच एजेंसियों को तीन महीने के भीतर मजिस्ट्रेट कोर्ट से इस जब्ती की पुष्टि करानी होगी। यदि ऐसा नहीं होता, तो खाताधारक उस राशि को भी निकाल सकेगा। • अधिकारों का हनन:- जस्टिस वर्मा ने टिप्पणी की कि बिना किसी ठोस आधार के पूरा खाता फ्रीज करना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और 19 (व्यापार का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है। आम आदमी के लिए इसके मायने - अक्सर साइबर फ्रॉड की एक छोटी सी कड़ी जुड़ने पर पुलिस पूरे बैंक खाते को फ्रीज करवा देती थी। इससे व्यापारियों का भुगतान रुक जाता था और आम लोगों को रोजमर्रा के खर्चों के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब देश भर में बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली बदलनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जांच के नाम पर किसी व्यक्ति की आजीविका नहीं छीनी जा सकती। इस फैसले से उन हजारों लोगों को न्याय मिलेगा जिनके खाते तकनीकी कारणों या छोटे संदिग्ध लेनदेन की वजह से महीनों से बंद पड़े हैं। आनंद पुरोहित/ 04 मार्च 2026