जेनेवा,(ईएमएस)। यूएनओसीटी के वार्षिक संबोधन के दौरान भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का मुद्दा उठाया। इस हमले को द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआएफ) ने अंजाम दिया था, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक चेहरा है। इस कायराना हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। भारत ने इस उदाहरण के जरिए दुनिया को बताया कि कैसे आतंकवादी संगठन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निर्दोषों को निशाना बना रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने कहा कि हमें आईएसआईएस और अल कायदा और उनके सहयोगियों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करनी होगी। भारत ने बहुपक्षीय सहयोग के लिए एक केंद्रीय साधन के रूप में वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति के महत्व पर जोर दिया। भारत जीसीटीएस की 9वीं समीक्षा के लिए परामर्श में सक्रियता से हिस्सा लेगा और इस प्रक्रिया में वार्ता के दौरान सह-सहायकों फिनलैंड और मोरक्को को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। भारत ने कहा कि न्यूयॉर्क और दुनिया भर में भारत की सभी पहल हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं, जिसमें ‘दिल्ली घोषणा’ भी शामिल है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने कहा कि आतंक फैलाने के उद्देश्य से संचालित गतिविधियों में नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने के मुद्दे पर ‘दिल्ली घोषणा’ एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। आतंकवादी उद्देश्यों में नयी एवं उभरती प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का मुद्दा कई सदस्य देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्टूबर 2022 में भारत की अध्यक्षता में गठित सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-विरोधी समिति (सीटीसी) ने ‘आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला’ विषय पर नई दिल्ली और मुंबई में एक विशेष बैठक का आयोजन किया था। विशेष बैठक के बाद समिति ने आतंकवादी उद्देश्यों में इस्तेमाल होने वाली नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने के लिए ‘दिल्ली घोषणा’ को अपनाया था। भारत आतंकवाद के लगातार विकसित हो रहे खतरे से निपटने के लिए अपने साझेदारों की क्षमता निर्माण और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने के वास्ते संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाओं के जरिए उसके साथ मिलकर काम करना जारी रखे हुए है। सिराज/ईएमएस 04मार्च26 ------------------------------