वाशिंगटन (ईएमएस)। न्यूयॉर्क के मैनहटन स्थित ट्रंप टावर में एक संदिग्ध पैकेज मिलने से पूरे अमेरिका में हड़कंप मच गया। यह घटना उस समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति चरम पर है। 58 मंजिला इमारत में, जो डोनाल्ड ट्रंप की कंपनी का मुख्यालय है, शाम लगभग 4:20 बजे सीक्रेट सर्विस को मेल रूम में एक संदिग्ध वस्तु मिली। सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई संदिग्ध पैकेज की सूचना मिलते ही न्यूयॉर्क पुलिस विभाग की बॉम्ब स्क्वायड, फायर ट्रक्स और टेक्निकल यूनिट्स ने फिफ्थ एवेन्यू को घेर लिया। सुरक्षा के मद्देनजर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया और इमरजेंसी अलर्ट जारी कर लोगों को इलाके से दूर रहने की सलाह दी गई। करीब दो घंटे की कड़ी जांच के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पैकेज में कोई विस्फोटक सामग्री नहीं थी और स्थिति सुरक्षित है। हालांकि इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। यह घटना केवल एक स्थानीय सुरक्षा चूक नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे भू-राजनीतिक तनाव की छाया है। वर्तमान में स्थिति काफी भयावह हो चुकी है। ईरान ने बहरीन, कुवैत और इजराइल पर हमले किए हैं। वहीं, नाटो की रक्षा प्रणाली ने ईरान द्वारा दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को तुर्किये के हवाई क्षेत्र में ही नष्ट कर दिया। युद्ध की विभीषिका में अब तक ईरान में 1,000 से अधिक, लेबनान में 70 और इजराइल में 12 लोगों की जान जा चुकी है। इस संघर्ष ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को बुरी तरह बाधित कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय नौवहन ठप हो गया है और लाखों यात्री फंसे हुए हैं। अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप का मजबूती से समर्थन किया है और युद्ध रोकने वाले प्रस्ताव को खारिज किया है। ट्रंप ने भी अमेरिकी सेना के प्रदर्शन की सराहना की है। हालांकि ट्रंप टावर की घटना को सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय साजिश से नहीं जोड़ा गया है, लेकिन इसने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि युद्ध की आग अब देशों की सीमाओं से निकलकर शहरों के बीच तक पहुँच रही है। आशीष दुबे / 05 मार्च 2026