- सास बहू की लड़ाई में..... अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ऊपर हमला करके सारी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की ओर ढकेल दिया है। इसमें भारत की हालत सबसे ज्यादा खराब है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के आठवें दिन सबसे ज्यादा खामियाजा भारत को भुगतना पड़ रहा है। जिस लड़ाई से भारत का कोई लेना-देना नहीं था, उसी लड़ाई में भारत को इतना बड़ा नुकसान होगा, शायद यह भारत ने नहीं सोचा होगा। अब जो परिणाम सामने आ रहे हैं, उसके बाद निश्चित रूप से भारत की सरकार को समझ आ रहा होगा। सास-बहू के झगड़े में जिस तरह से पति की स्थिति सबसे दयनीय होती है। ना तो वह अपनी मां के पक्ष में बोल पाता है, ना पत्नी के पक्ष में बोल पाता है। आज वही स्थिति भारत की इजरायल और ईरान के युद्ध के बीच में देखने को मिल रही है। इजरायल द्वारा युद्ध के दूसरे ही दिन ईरान के धार्मिक नेता आयतुल्लाह खामेनेई और ईरान की पहली और दूसरी पंक्ति के नेताओं और सुरक्षा कमांडरों को निशाना बनाकर मार दिया गया। उसके बाद ईरान ने आर-पार की लड़ाई की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। अमेरिका और इजरायल को ईरान की सैन्य ताकत के बारे में शायद सही अंदाजा नहीं था। जिसके कारण उन्होंने इतना बड़ा जोखिम मोल ले लिया, जो अब उनसे संभाले नहीं संभल रहा है। इजरायल ने ईरान के स्कूल में हमला करके 180 बच्चियों की सामूहिक हत्या की थी। उसके बाद ईरान बुरी तरह से भड़क गया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के तेलअबीब और येरूसलम को सबसे पहले निशाने में लिया उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर और खाड़ी देशों में जहां पर अमेरिकी सैन्य अड्डे थे, उन पर ईरानी मिसायलों से हमला किया। सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही, कि इजरायल का जो रक्षा सिस्टम था, वह ईरान की मिसाइलों का मुकाबला नहीं कर पाया। इजरायल को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कुछ इस तरह की स्थिति खाड़ी देशों के अमेरिकी सैन्य अड्डों की रही। जहां ईरान की मिसाइलें भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। रही-सही कसर ईरान ने हार्मोंज जल क्षेत्र से समुद्री जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया। जिसके कारण लगभग 30 फ़ीसदी देशों की तेल आपूर्ति और आयात निर्यात एक तरह से बंद हो गया है। अमेरिका द्वारा अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा नहीं कर पाने के कारण खाड़ी के देशों में भी दहशत फैल गई। रही-सही कसर अमेरिका ने ईरान के एक जहाज को, जो भारत के साथ शांतिपूर्वक युद्ध अभ्यास के लिए आया हुआ था। उस जहाज को अंतर्राष्ट्रीय समुद्र सीमा, जो श्रीलंका के पास लगती है। उस पर अमेरिका ने हमला करके उसे डूबा दिया। जिसके कारण ईरान के 87 से अधिक सैनिक मारे गए। 32 से अधिक नौसैनिक घायल हो गए हैं। इसमें भारत की भूमिका सबसे ज्यादा नकारात्मक रही है। युद्ध शुरू होने के 1 दिन पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल की यात्रा पर थे। उन्होंने इजराइल की संसद को संबोधित किया था। उनके वापस आते ही ईरान के ऊपर हमला हो गया। शिया समुदाय के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई के साथ-साथ लगभग दो दर्जन ईरान के कमांडरों की सामूहिक हत्या इजरायल द्वारा कर दी गई। उसके बाद भारत सरकार द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। ईरान को शोक संदेश भी नहीं भेजा गया, जिसके कारण भारत के ईरान के साथ जो संबंध थे, वह खराब हो गए। खाड़ी देशों में ईरान का हमला होने के कारण भारत के लगभग एक करोड़ लोग जो खाड़ी के देशों में नौकरी और रोजगार के लिए गए हुए थे, वह सब खतरे में पड़ गए हैं। रही सही कसर यूएई में पूरी हो रही है। भारत का सबसे ज्यादा निवेश यूएई के दुबई में लाखों करोड़ों डॉलर का है। लाखों लोग वहां काम कर रहे हैं। ईरान ने सबसे ज्यादा नुकसान दुबई को पहुंचाया है। जिसके कारण भारतीयों का निवेश वहां पर खतरे में पड़ गया है। इसके अलावा भारत ने अमेरिका के साथ जो ट्रेड डील की थी, उसमें रुस से तेल लेने का अमेरिकी प्रतिबंध लगा दिया गया था। भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में से प्रतिबंध लगाया है। इस स्थिति को देखते हुए, भारत सरकार को अमेरिका से रुस से कच्चे तेल और गैस आयात करने की अनुमति मांगनी पड़ी है। ईरान ने रूस और चीन के समुद्री जहाजों की आवाजाही को छूट दे रखी है। युद्ध के आठवें दिन भारत की यह सबसे बड़ी कूटनीतिक पराजय है। भारत में विपक्षी दल और दुनिया के अन्य देश भारत को इजरायल और अमेरिका का पिट्ठू मान रहे हैं। एक तरह से वैश्विक राजनीति में भारत अलग-थलग पड़ गया है। इराक के बाद यदि सबसे बड़ा नुकसान किसी देश को होने जा रहा है, तो वह भारत है। भारत का शेयर बाजार निरंतर गिरता चला जा रहा है। भारत के पास 15 दिन से ज्यादा का कच्चा तेल और गैस उपलब्ध नहीं है। डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत लगातार बढ़ रही है। जिसके कारण सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान भारत को हो रहा है। जिस तरह की स्थितियां वैश्विक स्तर पर बन रही हैं, उसमें भारत भी युद्ध के दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया है? स्वतंत्रता के बाद पहली बार वैश्विक राजनीति में भारत इतना कमजोर है। अब विपक्षी दलों के साथ-साथ आम नागरिक भी यह कहने लगे हैं। युद्ध की विभीषिका के बीच जिस तरह से बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर वहां पर भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है उसको लेकर भी सरकार की छवि को नुकसान हो रहा है। इजरायल और अमेरिका के नेतन्याहु और डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सत्ता को बचाए रखने, एपिस्टीन फाइल में जो खुलासे हो रहे थे। उससे बचने के लिए ईरान के साथ यह युद्ध शुरू किया है, जो अब तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ता हुआ दिख रहा है। इसमें भारत को भी बड़ा नुकसान होता हुआ दिख रहा है। ईएमएस / 06 मार्च 26