अंतर्राष्ट्रीय
07-Mar-2026
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-चीन का करीब 80फीसदी तेल मलक्का से होकर गुजरता है इस क्षेत्र पर भारत का है दबदबा तेहरान,(ईएमएस)। अमेरिका की परमाणु पनडुब्बी ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया। ईरान युद्ध के बीच ये हमला बहुत बड़ा रणनीतिक महत्व रखता है। ये चीन की मिडिल ईस्ट एनर्जी लाइफलाइन की कमजोरियों को दिखाता है। आईआरआईएस-डेना पर जिस तरह से हमला किया गया है उसने चीन को बहुत मजबूत जियो-पॉलिटिकल सिग्नल भेजा है। चीन जितना कच्चा तेल खरीदता है उसे वो समुद्री रास्तों से ही मंगवाता है। ऐसे में अगर युद्ध के समय चीन की एनर्जी सप्लाई लाइन बंद कर दिया जाए तो उसकी इकोनॉमी डगमगा सकती है। ताइवान के समय युद्ध में अमेरिका ऐसा कर सकता है। एक रिपोर्ट कहती है कि चीन का 92फीसदी तेल समुद्री रास्तों से आता है। चीन जो तेल खरीदता है उसका बहुत छोटा हिस्सा ही पाइपलाइन के जरिए रूस, कजाकिस्तान और म्यांमार से आता है। रिपोर्ट के मुताबिक चाइना पावर ने जून 2025 में अनुमान लगाया था कि रूस के अलावा चीन का लगभग 80फीसदी तेल इंपोर्ट मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरता है। भारत का इस क्षेत्र में दबदबा है। मलक्का स्ट्रेट, हिंद महासागर में दाखिल होने का दरवाजा है। मलक्का स्ट्रेट बंद होने से चीन के क्रूड ऑयल सप्लाई लाइन को बंद किया जा सकता है। अगर मलक्का स्ट्रेट ब्लॉक हो जाता है तो चीन तेल शिपमेंट को जारी रखने के लिए लोम्बोक-मकासर स्ट्रेट, सुंडा स्ट्रेट, आर्कटिक नॉर्दर्न सी रूट और अमेरिका से पैसिफिक रूट और ईस्ट साइबेरिया-पैसिफिक रूट जैसे दूसरे रास्ते ढूंढ सकता है। अमेरिका ने चीन की इन कमजोरियों को पकड़ रखा है। बहरीन में मौजूद यूएस का 5वां फ्लीट और डिएगो गार्सिया से काम करने वाली अमेरिकी सेनाएं हिंद महासागर में चीनी सप्लाई लाइन को कभी भी काट सकती हैं। भारतीय नौसेना और ऑस्ट्रेलियन नौसेना भी हिंद महासागर में चीन के तेल शिपमेंट को रोकने में मदद कर सकती हैं। दिसंबर 2023 के प्रोसीडिंग्स आर्टिकल में जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट माइकल हैनसन ने लिखा था कि अमेरिका और उसके साथी इन सप्लाई लाइनों के दूसरे छोर पर भी चीनी शिपिंग रूट को ब्लॉक कर सकते हैं, खासकर होर्मुज की खाड़ी पर जहां फारस की खाड़ी हिंद महासागर से जुड़ती है और बाब अल-मंडेब पर, जहां लाल सागर अदन की खाड़ी से जुड़ता है। हिंद महासागर की समुद्री कम्युनिकेशन लाइनों को सुरक्षित करने के अलावा चीन रूस के साथ अपनी पार्टनरशिप को मजबूत करके कॉन्टिनेंटल पिवट की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस पहले से ही चीन का सबसे बड़ा तेल सप्लायर है, जो चीन की तेल खरीद का 20फीसदी हिस्सा है। इसीलिए रूसी तेल पर चीन की निर्भरता यूक्रेन युद्ध के नतीजे पर निर्भर कर सकती है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने जोर देकर कहा है कि चीन नहीं चाहता कि रूस यूक्रेन में हारे, लेकिन हार न मानने का मतलब अपने आप जीतना नहीं है। इसीलिए हिंद महासागर काफी अहम बन चुका है जहां से चीन को घुटनों पर लाया जा सकता है। सिराज/ईएमएस 07 मार्च 2026