राज्य
07-Mar-2026
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रायपुर(ईएमएस)। प्रदेश में मार्च के पहले पखवाड़े में ही तेज गर्मी के साथ जल संकट की स्थिति बनने लगी है। कई इलाकों में बोर सूखने लगे हैं, जिससे राजधानी रायपुर समेत राज्य के कई शहरों और गांवों में पानी की किल्लत सामने आने लगी है। यह स्थिति तब है जब पिछले करीब सात वर्षों में जल आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए विभिन्न योजनाओं पर 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल संकट और दूषित जल की समस्या के स्थायी समाधान के लिए मल्टी-विलेज स्कीम शुरू की है। इसके तहत 4527 करोड़ रुपए की लागत से 18 जिलों में 71 योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस परियोजना के जरिए 3 हजार से अधिक गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जल आपूर्ति के लिए गांवों और शहरों में हजारों ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। वहीं नालों के गंदे पानी को शुद्ध करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी तैयार किए गए हैं, ताकि इस पानी का उपयोग उद्योगों और अन्य कार्यों में किया जा सके और पीने के पानी पर दबाव कम हो। प्रदेश में पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए जल जीवन मिशन, अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन सहित अन्य शहरी और ग्रामीण जल योजनाओं के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद गर्मी के दिनों में पानी की समस्या बनी रहती है। जाँच में सामने आया है कि कई प्रोजेक्ट अधूरे होने के कारण योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। राजधानी रायपुर के लाभांडी और फुंडहर जैसे इलाकों में ओवरहेड टंकियां वर्षों पहले बन चुकी हैं, लेकिन उन्हें अभी तक मुख्य राइजिंग पाइपलाइन से नहीं जोड़ा गया है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन विस्तार के लिए समय पर पर्याप्त बजट और तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलने से कई काम अधर में अटक गए। शहरों में पेयजल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था मजबूत करने के लिए अमृत मिशन के तहत करीब 3 से 4 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, कोरबा और अंबिकापुर जैसे शहरों में नई पाइपलाइन, जलाशय और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए हैं। राजधानी रायपुर में खारुन नदी के किनारे करीब 200 एमएलडी क्षमता के तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए हैं। मल्टी-विलेज स्कीम ऐसी योजना है, जिसमें एक बड़े जल स्रोत या जल शोधन संयंत्र से पाइपलाइन के माध्यम से कई गांवों को एक साथ पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इससे छोटे गांवों में अलग-अलग व्यवस्था बनाने की जरूरत नहीं पड़ती और साफ पानी की आपूर्ति अधिक प्रभावी तरीके से हो पाती है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)07 मार्च 2026