श्रीलंका ने भी एक अन्य ईरानी युद्धपोत आईरिस बुशहर में खराबी आने के बाद दी शरण नई दिल्ली,(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब भारत के समुद्री पड़ोस तक पहुंच गया है। श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने के बाद, भारत ने ईरान के एक दूसरे युद्धपोत आईरिस लावन को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दे दी है। इस कदम को भारत द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच एक बेहद जटिल बैलेंसिंग एक्ट के रूप में देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तनाव की शुरुआत बुधवार को हुई जब श्रीलंका के तट से करीब 19 समुद्री मील दूर एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी फ्रिगेट आईरिस डेना पर टॉरपीडो से हमला कर उसे डुबो दिया था। इस भीषण हमले में 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि यह पहली बार है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष भारत के इतने करीब पहुंच गया है। ईरानी युद्धपोत आईरिस लावन एक उभयचर युद्धपोत है। यह पिछले महीने भारत द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने आया था। अधिकारियों के मुताबिक ईरान ने 28 फरवरी को भारत से संपर्क कर तकनीकी खराबी का हवाला देते हुए युद्धपोत को कोच्चि में डॉक करने का अनुरोध किया था। भारत ने 1 मार्च को इसकी मंजूरी दी और बुधवार को यह जहाज कोच्चि पहुंचा। जहाज के 183 चालक दल के सदस्यों को वर्तमान में कोच्चि में नौसैनिकों के साथ ठहराया गया है। भारत की तरह श्रीलंका ने भी एक अन्य ईरानी युद्धपोत आईरिस बुशहर को अपने यहा शरण दी है। इंजन में खराबी के बाद इसके 208 सदस्यों को एक नौसैनिक कैंप में ठहराया गया है। श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायक ने इसे एक मानवीय जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत संकट में फंसे जहाज की मदद करना उनका कर्तव्य है। भारत के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ ईरान के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका भारत का सबसे अहम रणनीतिक साझेदार है। देश के भीतर विपक्षी दलों और पूर्व राजनयिकों ने भारत के रणनीतिक बैकयार्ड में ईरानी जहाज के डूबने पर भारत की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी ढंग से बंद करने की धमकियों के बीच भारत की तेल आपूर्ति खतरे में है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 50फीसदी इसी मार्ग से मंगाता है। सिराज/ईएमएस 07मार्च26 -----------------------------