भोपाल(ईएमएस)। एम्स भोपाल निरंतर उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। इसी क्रम में, एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर के नेतृत्व में हॉस्पिटल कॉर्निया रिट्रीवल प्रोग्राम के माध्यम से हुए नेत्रदान ने दो मरीजों के जीवन में नई रोशनी भर दी। एम्स भोपाल के नेत्र बैंक और नेत्र रोग विभाग ने सफल उपचार कर दो ऐसे मरीजों को दृष्टि प्रदान की, जो लंबे समय से अंधकारमय जीवन जी रहे थे। पहला मामला 51 वर्षीय मरीज का है, जिसने छह वर्ष पूर्व गिटार के तार से लगी चोट के कारण अपनी आंख की पुतली गंवा दी थी। उन्हें पहले से ही एक आंख से कम दिखाई देता था और दूसरी आंख में चोट लगने के बाद उनका जीवन अत्यंत कठिन हो गया था। वह अपने परिवार के साथ होली मनाने की उम्मीद तक छोड़ चुके थे। हर वर्ष जब उनके बच्चे रंग खेलते थे, तो वह उन्हें स्पष्ट रूप से देख नहीं पाते थे। इस वर्ष स्थिति बदली। नेत्र रोग विभाग ने उनका सफल पुतली प्रत्यारोपण किया। इस बार वे अपने परिवार के साथ होली के रंग देखते हुए त्योहार मना पाए। इसी प्रकार, 63 वर्षीय एक अन्य मरीज, जो द्विपक्षीय अंधता से पीड़ित थे और जिनकी दोनों आंखें सफेद हो चुकी थीं, को भी नेत्रदान के माध्यम से नई दृष्टि प्राप्त हुई। पहली बार रंगों को देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने अपने परिवार के साथ होली मनाई और जीवन में नई आशा की किरण का अनुभव किया। इन दोनों सफलताओं का श्रेय एम्स भोपाल के नेत्र विभाग की विशेषज्ञता और समर्पण को जाता है। साथ ही, उन नेत्रदानकर्ताओं का भी विशेष योगदान है, जिनके दान ने इन मरीजों के जीवन में उजाला किया। एम्स भोपाल ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे नेत्रदान के महत्व को समझें और इस मानवीय कार्य से जुड़ने का संकल्प लें, ताकि और भी लोगों के जीवन में रंग और रोशनी लाई जा सके। हरि प्रसाद पाल / 07 मार्च, 2026