पूर्व मंत्री और हारे हुए नेताओं को नहीं देंगे निगम-मंडल में जगह भोपाल(ईएमएस)। मप्र में करीब दो साल के इंतजार के बाद नेताओं को राजनीतिक नियुक्ति की आस जगी है। निगम-मंडल-प्राधिकरणों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए सूची तैयारी हो गई है। सत्ता-संगठन ने सूची तैयार करके दिल्ली भेज दी है। अब आलाकमान तय करेगा की किसको अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी मिलेगी। वहीं सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने अपनी ही पार्टी के कई नेताओं के मंसूबे पर पानी फेर दिया है। पार्टी द्वारा यह निश्चित किया गया है कि पूर्व मंत्री और चुनाव हारे हुए नेताओं को निगम-मंडल में स्थान देकर उनका पुनर्वास नहीं किया जाएगा। अभी पहले सभी नगर निगम में एल्डरमैन की नियुक्ति की जाएगी। इसके बाद में निगम-मंडल में नियुक्ति का काम शुरू होगा। पिछले काफी समय से निगम-मंडल में नियुक्ति को लेकर कसरत चल रही है। बार-बार यह कहा जाता है कि सूची तैयार है और नियुक्ति होने ही वाली है। फिर अचानक से नियुक्ति पर ब्रेक लग जाता है और कोई चर्चा नहीं की जाती है। लंबे समय से प्रतीक्षित इन नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। भाजपा संगठन द्वारा यह निश्चय किया गया है कि पहले नगर निगम के एल्डरमैन की नियुक्ति की जाएगी। उसके बाद में निगम मंडल में नियुक्ति का सिलसिला शुरू किया जाएगा। इसके पीछे कारण यह है कि मैदानी कार्यकर्ताओं को नियुक्ति देकर संगठन में एक रफ्तार बनाने की कोशिश की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश भाजपा संगठन के द्वारा यह भी निश्चित किया गया है कि निगम मंडल की नियुक्ति में पूर्व मंत्री और हारे हुए नेताओं को स्थान नहीं दिया जाएगा। कांग्रेस छोडक़र भाजपा में आए नेताओं में से भी कुछ लोगों को इस नियुक्ति में उपकृत किया जाएगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी यह स्पष्ट किया है कि निगम मंडल में नियुक्ति के लिए सूची पूरी तरह से तैयार है। केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा मोहर लगाई जाने के बाद इस सूची को जारी किया जाएगा। 15 मार्च के बाद नियुक्तियां जानकारी के अनुसार, मप्र सरकार 15 मार्च के बाद सरकारी संस्थाओं में राजनीतिक नियुक्तियां शुरू कर सकती है। जानकारों की मानें तो इन पदों पर पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं को बैठाने की तैयारी में है, जो पार्टी संगठन की नजर में समर्पित और बेहतर काम करने वाले हैं। कहा जा रहा है कि सूची से सिफारिशी नेताओं के नाम काट दिए गए हैं। गौरतलब है कि इन दिनों भाजपा राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में व्यस्त है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी बिहार से राज्यसभा प्रत्याशी हैं। इसी दौरान बिहार में भी सत्ता परिवर्तन का दौर चलेगा, जिससे भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व व्यस्त रहेगा। राज्यसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद भाजपा नेतृत्व मध्यप्रदेश के निर्णयों पर गौर करेगा। सूत्रों की मानें तो इसके बाद ही सरकारी संस्थाओं पर राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता साफ होगा। जानकारों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नितिन नबीन की ताजपोशी के बाद प्रदेश के निगम मंडल की सूची नए सिरे से तैयार की गई है। इस सूची को लेकर पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पार्टी अध्यक्ष के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मंत्रणा हो चुकी है। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश के प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह सहित दूसरे नेताओं ने भी सीएम व प्रदेशाध्यक्ष के साथ चर्चा की है। इसके बाद आंशिक संशोधन के बाद सूची को एक बार फिर से दिल्ली भेजा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि 15 मार्च के बाद इन सूचियों पर मुहर लगनी शुरू हो जाएगी और पार्टी को जिन नेताओं को उपकृत करना है, उनके नामों की घोषणा हो जाएगी। लंबे समय से टल रहा निर्णय बता दें, कि लोकसभा चुनाव के बाद से ही इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा चल रही थी। कई बार सूची तैयार होने की बात सामने आई, लेकिन अंतिम निर्णय टलता रहा। अब माना जा रहा है कि इसी माह कभी भी इस संबंध में आधिकारिक रूप से सूची जारी की जा सकती है। भाजपा बचे हुए मोर्चो की कार्यकारिणी, जिला कार्यकारिणी, मंडल पदाधिकारियों, एल्डर मैन समेत अन्य पदों पर नियुक्ति के आदेश जल्द जारी करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी नगरीय निकाय और अन्य चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक संतुलन बनाना पार्टी की प्राथमिकता है। ऐसे में इन नियुक्तियों को रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। उधर, मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें जारी हैं। सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल का विस्तार तय माना जा रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया अभी नहीं होगी और इसके लिए करीब दो से तीन महीने का समय लग सकता है। विनोद उपाध्याय / 07 मार्च, 2026