राष्ट्रीय
07-Mar-2026
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:: राष्ट्रपति से मिला राष्ट्रीय सम्मान, अब मध्यप्रदेश सरकार से यथोचित प्रोत्साहन की बाट जोह रही हैं वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर बेटी :: इंदौर (ईएमएस)। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हो और इंदौर की बेटी पूजा गर्ग का नाम नहीं लिया जाए, यह संभव ही नहीं। इंदौर में जन्मी पूजा गर्ग आज साहस, संकल्प और सामाजिक परिवर्तन की एक सशक्त मिसाल बन चुकी हैं। 3 दिसंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा “दिव्यांगजन सशक्तीकरण हेतु राष्ट्रीय पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें दिव्यांग सशक्तीकरण, खेल और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अभी भी यथोचित प्रोत्साहन एवं सम्मान नहीं मिल पाया है, जिसकी वे सच्ची हक़दार हैं। पूजा गर्ग की जीवन यात्रा संघर्ष, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति की कहानी है। वर्ष 2010 में एक गंभीर स्पाइनल कॉर्ड एक्सीडेंट के कारण वे पूरी तरह पैरालाइज हो गई थीं। उस समय डॉक्टरों ने यह मान लिया था कि वे फिर से सामान्य जीवन नहीं जी पाएँगी। लेकिन पूजा ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय संघर्ष को अपना हथियार बनाया। 13 बड़ी सर्जरी, 10,000 से अधिक इंजेक्शन और वर्षों की शारीरिक व मानसिक पीड़ा के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। आज वे भारत की अंतरराष्ट्रीय पैरा केनो (Kayak & Canoe) एथलीट, वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर, कैंसर सर्वाइवर और एक प्रेरक वक्ता के रूप में वैश्विक मंचों पर भारत का गौरव बढ़ा रही हैं। वर्ष 2025 में थाईलैंड में आयोजित एशियन पैरा केनो चैंपियनशिप में पूजा गर्ग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 200 मीटर वीएल2 और 500 मीटर वीएल2 स्पर्धा में दो कांस्य पदक जीतकर भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। इसके अलावा उन्होंने 2023 में उज़्बेकिस्तान और 2024 में जापान में आयोजित एशियन पैरा केनो चैंपियनशिप में चौथा स्थान प्राप्त किया। वहीं 2025 में पोलैंड में आयोजित आईसीएफ वर्ल्ड पैरा केनो कप तथा इटली में आयोजित आईसीएफ वर्ल्ड पैरा केनो चैंपियनशिप में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। अक्टूबर 2024 में पूजा गर्ग ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उन्होंने इंदौर से नाथूला दर्रा (14,400 फीट) तक लगभग 4,500 किलोमीटर की 4-व्हील बाइक यात्रा पूरी की और दुनिया की पहली पैराप्लेजिक महिला बनीं जिन्होंने इस ऊँचाई तक पहुँचकर भारतीय तिरंगा फहराया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकार्ड्स (लंदन) द्वारा भी मान्यता दी गई है। खेल उपलब्धियों के साथ-साथ पूजा गर्ग सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे “पंखों की उड़ान चैरिटेबल फाउंडेशन” की डायरेक्टर हैं। उनके ट्रिपल सी सेंटर के माध्यम से अब तक 135 से अधिक कैंसर मरीजों को निःशुल्क काउंसलिंग और मानसिक सहयोग प्रदान किया जा चुका है। पूजा गर्ग को ग्लोबल ह्युमेनीटेरियन करेज एंड रेजिलेंस अवार्ड, यूरेशिया एफ्रो ग्लोबल अवार्ड और भोपाल ब्रांड योद्धा अवार्ड सहित अनेक सम्मानों से नवाजा जा चुका है। पूजा गर्ग यह साबित करती हैं कि सीमाएँ शरीर में हो सकती हैं, लेकिन सपनों और हौसलों की उड़ान को कोई रोक नहीं सकता। प्रकाश/07 मार्च 2026