राष्ट्रीय
08-Mar-2026
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-अमेरिकी बर्खास्तगियों के बाद ईरान पर बमबारी से उठ रहे सवाल नई दिल्ली,(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बीच ईरान पर भारी बमबारी जारी है। हफ्ताभर हो चुका इस युद्ध को शुरु हुए लेकिन फिलहाल इसके थमने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इसका असर पड़ोसी मुल्कों खासकर भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका समेत खाड़ी देशों में देखने को मिल रहा है। इसी समय अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) में बड़े पैमाने पर बर्खास्तगियों की खबर ने सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों को जहां बढ़ा दिया वहीं अनेक सवाल भी खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एफबीआई निदेशक काश पटेल ने करीब एक दर्जन एजेंटों और स्टाफ सदस्यों को बर्खास्त कर दिया है। इनमें वे कर्मचारी भी शामिल हैं जिनका कभी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े मामलों और ईरान या उससे जुड़े प्रॉक्सी समूहों की जांच में नाम शामिल था। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बर्खास्तगियों के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम हो गई है, ऐसे समय में जब युद्ध के चलते सुरक्षा चुनौतियां पहले से बढ़ी हुई हैं। एफबीआई और जस्टिस डिपार्टमेंट ने पिछले एक साल में कई अहम सुरक्षा पदों पर दशकों का अनुभव खो दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध और बर्खास्तगियों का यह संयोजन अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि अनुभवी एजेंटों की कमी खुफिया और ऑपरेशनल तैयारी पर असर डाल सकती है। वहीं दूसरी तरफ इजरायली एयरफोर्स ने जहां ईरान के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर बमबारी की, तो वहीं ईरान ने भी बड़ी संख्या में मिसाइलें दागकर प्रतिक्रिया दी है। इस युद्ध का असर अब पड़ोसी मुल्कों में साफ देखने को मिल रहा है। आयात-निर्यात ठप प्राय: हो गया और तेल भंडार में कमी और उपलब्धता को देखते हुए तेल व गैस की कीमतों में खासी बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। इसकी मार भारत और पाकिस्तान में बराबर देखने को मिली है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो अमेरिका खुद भी अब तेल संकट से जूझता नजर आ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के हमले, साथ ही एफबीआई में हुई बर्खास्तगियां, ईरान पर दबाव बनाने और युद्ध की रणनीति में तेजी लाने का संकेत हैं। हालांकि इससे अमेरिकी सुरक्षा ढांचे में खामियां भी सामने आई हैं, जो युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय रणनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती हैं। मिडिल ईस्ट में स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले दिनों में सुरक्षा, राजनीतिक और रणनीतिक संतुलन पर इस घटनाक्रम का व्यापक असर पड़ सकता है। हिदायत/ईएमएस 08 मार्च 2026