लेख
09-Mar-2026
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रूस के राष्ट्रपति वलादिमीर पुतिन के हालिया बयान ने अंतर्राष्ट्रीय जगत की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। पुतिन के इस बयान से अमेरिका की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, रूस वर्तमान स्थिति मे जो संघर्ष दुनिया के कई देशों के बीच में चल रहे हैं, उसमें वह तटस्थ नहीं है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर जो हमला किया गया है उसमें रूस ईरान के साथ खड़ा है। यह बयान ऐसे समय पर आया है। जब अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ रहा है। सारी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ रही है। पुतिन का यह रुख मात्र एक बयान नहीं है बल्कि इसे पश्चिमी देशों की नीतियों एवं दादागिरी पर सीधी चुनौती के रूप में माना जा रहा है। रूस का आरोप है, अमेरिका और उसके सहयोगी देश अंतर्राष्ट्रीय कानून की अनदेखी कर मनमानी कर रहे हैं। इसी संदर्भ में पुतिन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों जिसमे अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन (पी5) देशों की बैठक बुलाने का प्रस्ताव दिया है। पुतिन का कहना है, दुनिया की महाशक्तियों को यह तय करना होगा, अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था “कानून के शासन” (रुल ऑफ लॉ) से चलेगी या फिर ताकत के आधार पर एक देश दूसरे देशों के साथ व्यवहार करेंगे। रूस का कहना है, आज की स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ, सुरक्षा परिषद एवं अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की कोई भूमिका देखने को नहीं मिल रही है। पुतिन ने चेतावनी देते हुए कहा, वास्तविकता में शक्तिशाली देश अपने हितों के अनुसार निर्णय लेते हुए कार्रवाई कर रहे हैं। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कानूनो का पालन नहीं हो रहा है। यदि यही स्थिति जारी रही तो, अन्य देश भी उसी रास्ते पर चलने के लिए मजबूर होंगे। जिसके कारण सारी दुनिया एक बार फिर संघर्ष की स्थिति में जाकर खड़ी हो जाएगी। इससे वैश्विक व्यवस्था को नियंत्रित कर पाना असंभव होगा। पुतिन के इस बयान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है, रूस ने सीधे तौर पर ईरान के प्रति अपना खुला समर्थन जताया है। पश्चिमी देशों के द्वारा जिस तरह से मनमाने तरीके से कार्यवाही की जा रही है, उसको पूरी तरह से अस्वीकार करते हुए चेतावनी दी है। पश्चिमी और कुछ अरब देशों द्वारा ईरान को इस संघर्ष का मुख्य जिम्मेदार बताया जा रहा है। पुतिन ने इसके लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा दिया है। रूस का कहना है, ईरान केवल हमलों का जवाब दे रहा है। अमेरिका और इजरायल ने उस पर जो हमला किया था ईरान को अपना बचाव करने का पूरा अधिकार है। जबकि पश्चिम के देश इसे ईरान की आक्रामक कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देश मानते हैं, ईरान की गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं। यही कारण है, मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था एवं राजनीति पर पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए पुतिन का यह प्रस्ताव कि पी5 के देश मिलकर वर्तमान स्थिति में एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट करें। रूस के राष्ट्रपति के इस बयान को अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। विश्व की प्रमुख शक्तियां इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा करती हैं। ऐसी स्थिति में सारी दुनिया के देशों में एक बेहतर संदेश और एकजुटता बनाने में मदद मिलेगी। जो अंतर्राष्ट्रीय कानून बने हुए हैं, उनका पालन यदि कोई देश नहीं कर रहा है तो ऐसी स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन करने की बाध्यता वैश्विक स्तर पर तैयार की जानी चाहिए। ताकि वैश्विक व्यवस्था का विश्वास एवं सुरक्षा को पुनः बहाल किया जा सके। यह समय की मांग है। महाशक्तियों का यह दायित्व है कि वह दुनिया के देशों को अंतर्राष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत कर सारी दुनिया में शांति बनाए रखना चाहती हैं या नहीं। पुतिन की यह चिंता जायज है। अमेरिका जैसे देश दादागिरी करके एक बार फिर जंगल राज की ओर आगे बढ़ रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय नियमों और कानूनो का पालन नहीं हो रहा है। शक्ति संतुलन के आधार पर जिस तरह से दुनिया के देशों को मनमर्जी से हांका जा रहा है, उसके कारण एक बार फिर दादागिरी की नई विश्व व्यवस्था बन रही है। समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध वाले एक बार फिर हालात पैदा हो सकते हैं। अमेरिका और अन्य प्रमुख महाशक्तियों को विश्व के सभी देशों को स्पष्ट उत्तर देना ही होगा। वर्तमान स्थिति में जिस तरह के हालात बने हुए हैं सारी दुनिया के देश युद्ध की आशंका से जूझ रहे हैं। वैश्विक आर्थिक मंदी के हालात बनने लगे हैं सारी दुनिया के देशों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ना तय है। वैश्विक व्यापार संधि के बाद सारी दुनिया के देश आपस में जिस तरह से व्यापार और व्यवसाय कर रहे थे आर्थिक विकास हो रहा था अब वह सब एक ही झटके में खत्म होने की स्थिति बन रही है। रूस के राष्ट्रपति ने महाशक्तियों को चेतावनी देते हुए जो कहा है उस पर तुरंत अमल हो इसके लिए सभी पांचो महाशक्तियों को आगे आकर निर्णय करना चाहिए। किसी भी महाशक्ति को गैंगस्टर बनकर मनमानी करने की छूट नहीं दी जा सकती है। ईएमएस / 09 मार्च 26