लेख
09-Mar-2026
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(10 मार्च सीआईएसएफ स्थापना दिवस पर विशेष) भारत के विकास की गति केवल आर्थिक योजनाओं और औद्योगिक विस्तार से तय नहीं होती बल्कि उन संस्थानों की सुरक्षा से भी तय होती है जो देश की आर्थिक शक्ति के आधार हैं। किसी भी राष्ट्र की प्रगति तभी स्थायी और सुरक्षित हो सकती है जब उसके महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान पूरी तरह सुरक्षित हों। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की स्थापना की गई। यह बल आज देश की औद्योगिक संरचना की सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार बन चुका है और राष्ट्रीय विकास को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सीआईएसएफ का स्थापना दिवस प्रतिवर्ष 10 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन उन हजारों जवानों के साहस अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मान देने का अवसर है जो देश के महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा में निरंतर कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2025 में 56वाँ स्थापना दिवस तमिलनाडु के थक्कोलम में आयोजित किया गया जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सीआईएसएफ की स्थापना 10 मार्च 1969 को संसद द्वारा पारित कानून के अंतर्गत की गई थी। उस समय देश में सार्वजनिक क्षेत्र के औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की आवश्यकता तेजी से महसूस की जा रही थी। प्रारंभ में इस बल में केवल तीन बटालियन और लगभग 2800 कर्मी थे। उस समय इसकी भूमिका सीमित थी लेकिन इसका उद्देश्य स्पष्ट था कि देश की औद्योगिक और रणनीतिक संपत्तियों को सुरक्षित रखा जाए। समय के साथ भारत के औद्योगिक क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ और उसके साथ ही सीआईएसएफ की जिम्मेदारियाँ भी बढ़ती चली गईं। आज यह बल लगभग दो लाख कर्मियों की शक्ति के साथ देश के सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा संगठनों में शामिल हो चुका है। यह बल देश के 70 से अधिक हवाई अड्डों और सैकड़ों महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात है। इसकी कार्यक्षमता और अनुशासन के कारण इसे राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र का एक मजबूत स्तंभ माना जाता है। सीआईएसएफ की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका देश के औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना है। भारत के पेट्रोलियम संयंत्र इस्पात उद्योग कोयला खदान और ऊर्जा केंद्र देश की आर्थिक रीढ़ हैं। इन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इन पर किसी भी प्रकार का खतरा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। सीआईएसएफ के प्रशिक्षित जवान इन क्षेत्रों में चौबीसों घंटे सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हैं और किसी भी संभावित खतरे को रोकने का कार्य करते हैं। यह बल देश के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्रों की सुरक्षा भी करता है। ऐसे संस्थान राष्ट्रीय सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रगति के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। सीआईएसएफ आधुनिक निगरानी प्रणाली तकनीकी उपकरणों और विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से इन संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। हवाई अड्डों की सुरक्षा में भी सीआईएसएफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सबसे संवेदनशील विषयों मंष से एक है क्योंकि यह सीधे लाखों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा होता है। सीआईएसएफ के जवान यात्रियों की जांच सामान की स्कैनिंग और परिसर की निगरानी जैसे कार्यों को अत्यंत सावधानी और अनुशासन के साथ निभाते हैं। इसी प्रकार मेट्रो रेल नेटवर्क की सुरक्षा भी सीआईएसएफ की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत के कई महानगरों में लाखों लोग प्रतिदिन मेट्रो सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसी स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। सीआईएसएफ के जवान मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में सतर्कता के साथ सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करते हैं। सीआईएसएफ केवल औद्योगिक और परिवहन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश की सांस्कृतिक धरोहरों और महत्वपूर्ण सरकारी भवनों की सुरक्षा भी करता है। विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल सहित कई ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा में भी सीआईएसएफ की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह बल पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ साथ राष्ट्रीय धरोहरों की रक्षा का कार्य भी करता है। समय के साथ बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सीआईएसएफ ने स्वयं को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाया है। ड्रोन निगरानी डिजिटल सुरक्षा प्रणाली और आधुनिक हथियारों के उपयोग के माध्यम से यह बल अपनी क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है। सुरक्षा के क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने के कारण यह बल आधुनिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बन रहा है। सरकार ने सीआईएसएफ को हाइब्रिड मॉडल के माध्यम से और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास किया है। इस मॉडल के अंतर्गत अब निजी औद्योगिक संस्थानों को भी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे देश के औद्योगिक ढांचे की सुरक्षा और अधिक व्यापक और मजबूत हो सकेगी। सीआईएसएफ के जवानों का प्रशिक्षण भी अत्यंत कठोर और व्यवस्थित होता है। भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक दक्षता को विशेष महत्व दिया जाता है ताकि जवान हर परिस्थिति में सक्षम और सक्रिय रह सकें। नियमित प्रशिक्षण और अभ्यास के माध्यम से उन्हें आधुनिक सुरक्षा तकनीकों और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाता है। देश की आंतरिक सुरक्षा में भी सीआईएसएफ का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर इसने कई अभियानों में सहयोग दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में इस बल की सक्रिय भूमिका ने इसे एक विश्वसनीय सुरक्षा संस्था के रूप में स्थापित किया है। सीआईएसएफ का आदर्श वाक्य संरक्षण और सुरक्षा है। यह केवल एक नारा नहीं बल्कि बल के प्रत्येक जवान की कार्य भावना का प्रतीक है। सीआईएसएफ के जवान हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं। उनके साहस अनुशासन और समर्पण के कारण ही देश की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियाँ सुरक्षित रह पाती हैं। भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए औद्योगिक विकास और आर्थिक विस्तार अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में देश के औद्योगिक और रणनीतिक संस्थानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाला एक मजबूत सुरक्षा बल भी उतना ही आवश्यक है। सीआईएसएफ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बल न केवल औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है बल्कि राष्ट्रीय विकास को सुरक्षित बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अंततः यह कहा जा सकता है कि सीआईएसएफ भारत की औद्योगिक सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ है। स्थापना के समय सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह बल आज देश की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। अनुशासन साहस और समर्पण की भावना से प्रेरित इसके जवान राष्ट्र की सेवा में निरंतर कार्य कर रहे हैं और भारत के विकास को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ईएमएस/09/03/2026