राज्य
09-Mar-2026
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- पूर्व सैनिकों की दिव्यांग पेंशन पर इनकम टैक्स लगाने के फैसले का रिटायर्ड फौजियों ने किया विरोध, रिटायर्ड मेजर जनरल बोले भोपाल (ईएमएस)। केंद्र सरकार के बजट में पूर्व सैनिकों की दिव्यांग पेंशन पर इनकम टैक्स लगाने के फैसले का रिटायर्ड फौजियों ने विरोध शुरू कर दिया है। कांग्रेस भूतपूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रिटायर्ड मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। श्याम श्रीवास्तव ने कहा कि डिसेबिलिटी पेंशन उन सैनिकों को मिलती है, जो युद्ध में या किसी अन्य चोट के कारण दिव्यांग हो जाते हैं। ऐसे सैनिकों को सरकार की ओर से दिव्यांग पेंशन दी जाती है। यह मुख्य पेंशन का एक तय प्रतिशत होता है। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों को मिलने वाली इस दिव्यांग पेंशन पर सरकार ने इस बजट में इनकम टैक्स लगा दिया है। यह सैनिकों पर भारी पड़ रहा है। सरकार दिव्यांग पेंशन से 30 प्रतिशत तक टैक्स लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि 1922 में बने पहले इनकम टैक्स एक्ट में यह प्रावधान था कि ऐसे सैनिकों की पेंशन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। 104 साल बाद इस सरकार ने उस पेंशन पर भी टैक्स लगा दिया है। हम चाहते हैं कि सरकार पेंशन पर लगाया गया इनकम टैक्स वापस ले। आखिर सरकार पूर्व सैनिकों की पेंशन पर टैक्स लगाकर कितना पैसा कमा लेगी? ईसीएचएस स्वास्थ्य योजना में बजट की कमी पूर्व सैनिकों के लिए कैशलेस इलाज सुनिश्चित करने वाली ईसीएचएस योजना की बदहाल स्थिति पर भी चिंता जताई गई। आरोप लगाया गया कि 2025 के अंत से बजट में कटौती के कारण अस्पतालों के बिलों का भुगतान महीनों से लंबित है। इसके कारण कई निजी अस्पतालों ने पूर्व सैनिकों का इलाज करना बंद कर दिया है। सेना में चार साल की अस्थायी भर्ती वाली अग्निवीर योजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। दावा किया गया कि अगले 8-10 सालों में भारतीय सेना में स्थायी सैनिकों की संख्या घटकर केवल 3.5 लाख रह जाएगी। कांग्रेस ने मांग की कि सभी अग्निवीरों को नियमित किया जाए, ताकि युवा भविष्य में कुंठा या अपराध की ओर न बढ़ें। श्याम श्रीवास्तव ने कहा कि अग्निवीर योजना में भर्ती के चार साल बाद 75 प्रतिशत सैनिकों को वापस कर दिया जाएगा। उन्हें कोई ग्रेच्युटी, पेंशन या शहीद अलाउंस नहीं मिलेगा। चार साल बाद उन्हें वापस भेज दिया जाएगा, फिर वे क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह भर्ती चलती रही, क्योंकि बाकी भर्तियां लगभग बंद कर दी गई हैं, तो धीरे-धीरे अग्निवीरों की संख्या बढ़ती जाएगी। जो सैनिक सिर्फ चार साल काम करेंगे। इससे स्थायी सैनिकों की संख्या लगातार घटती जाएगी। उन्होंने कहा कि आज भारतीय सेना में करीब 14 लाख सैनिक हैं। यदि यही व्यवस्था रही तो 10-11 साल बाद केवल करीब साढ़े तीन लाख स्थायी सैनिक ही बचेंगे, जो युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार होंगे, जबकि बाकी बड़ी संख्या में अग्निवीर होंगे। सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलने का आरोप मध्य प्रदेश में पूर्व सैनिकों के लिए तृतीय श्रेणी में 10 प्रतिशत और चतुर्थ श्रेणी में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। कांग्रेस का आरोप है कि विज्ञापनों में तो यह आरक्षण दिखाया जाता है, लेकिन चयन प्रक्रिया में वास्तविक लाभ नहीं दिया जाता, जिससे योग्य पूर्व सैनिक मुख्य सूची से बाहर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सैनिकों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का सही लाभ मिलता, तो पुलिस, राजस्व सहित कई विभागों में पूर्व सैनिक सेवाएं दे रहे होते। आज स्थिति यह है कि देश के लिए लड़ चुके सैनिक गार्ड की नौकरी करने को मजबूर हैं। पुलिस द्वारा दुव्र्यवहार की घटनाओं की निंदा विज्ञप्ति में हाल के सालों (2024-2025) की कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया गया, जिनमें राजस्थान, मेरठ, अलीगढ़ और झांसी में पुलिस द्वारा सैनिकों या पूर्व सैनिकों के साथ मारपीट और दुव्र्यवहार की खबरें सामने आईं। इसे असहनीय और अक्षम्य बताया गया है। विनोद / 09 मार्च 26