सिस्टम को लेकर पहले भी कई बार शीर्ष न्यायपालिका पर सवाल उठे नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कॉलेजियम सिस्टम की कार्य प्रणाली पर यह कहकर सवाल उठा दिए हैं कि इसमें पारदर्शिता की बहुत कमी है। एक कार्यक्रम में जस्टिस दत्ता ने इस सिस्टम को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दत्ता ने कॉलेजियम सिस्टम को लेकर जो कुछ भी भावनाएं जाहिर की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर पोस्टिंग की सिफारिश करने वाले कॉलेजियम सिस्टम पर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। क्योंकि, अब खुद सुप्रीम कोर्ट के जज ने इस सिस्टम पर प्रश्न उठाए हैं, इस सिस्टम को लेकर पहले भी कई बार शीर्ष न्यायपालिका पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। जस्टिस दत्ता के मुताबिक पारदर्शिता की इतनी कमी है कि अक्सर जजों को भी बहुत कम स्पष्टता होती है कि कॉलेजियम काम कैसे करता है और इसकी बैठकें कहां होती हैं। उन्होंने कहा, आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि न सिर्फ हम जानते हैं कि क्या हो रहा है...हम ये तक नहीं जानते कि कॉलेजियम बैठता कहां है। सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके दत्ता ने कहा कि न्यायिक नियुक्तियां जेंडर की संख्या के बजाए मैरिट के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, जब हाई कोर्ट के जजों के पद पर प्रमोशन की बात आती है, तब मैं नंबरों पर नहीं जाऊंगा। ऐसा नहीं कि 50 में से महिलाओं को 25 क्यों नहीं मिल सकते, 30 क्यों नहीं दिए जा सकते? यह जेंडर न्यूट्रलिटी है। हमें मैरिट पर जाना चाहिए। जस्टिस दत्ता का कहना है कि बेंच में प्रमोशन के लिए व्यक्ति की क्षमता, ईमानदारी और उसके स्वभाव को ध्यान में रखना चाहिए। उनके मुताबिक, मैं प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व के खिलाफ हूं। अगर कोई जज बनने लायक है, उसे मौका मिलाना चाहिए। कॉलेजियम सिस्टम क्या है कॉलेजियम सिस्टम से ही हायर जुडिशरी में जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर होती है। कॉलेजियम सिस्टम को न संसद ने कानून पास करके बनाया है और न ही यह संवैधानिक प्रावधान है। कॉलेजियम सिस्टम ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से आकार लिया है, जिसमें पांच वरिष्ठ जज शामिल होते हैं। कॉलेजियम सिस्टम की अगुवाई भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) करते हैं। आशीष दुबे / 09 मार्च 2026