राष्ट्रीय
11-Mar-2026
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सरकार ने कहा, घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं नई दिल्ली (ईएमएस)। देश में एलपीजी (एलपीजी) सप्लाई को लेकर बढ़ते संकट के बीच मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्षी दलों ने मोदी सरकार से मांग की है कि इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा हो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करे। आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि कमर्शियल सिलेंडरों की कमी को लेकर लोगों के मन में अनिश्चितता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को संसद में आकर इस मुद्दे पर बयान देना चाहिए, ताकि देश को स्पष्ट जानकारी मिल सके। उनका कहना है कि जब विदेश मंत्रालय बयान देता है, तब उसमें कई सवालों के जवाब नहीं मिलते, जिससे स्थिति और अस्पष्ट हो जाती है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से बताया गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है और एलपीजी की सप्लाई पहले की तरह जारी रखने की कोशिश हो रही है। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि मोदी सरकार इस समस्या के समाधान के लिए काम कर रही है और जल्द ही सप्लाई सामान्य होगी। मोदी सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद कई रिफाइनरियों ने गैस उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। वहीं केंद्र सरकार ने संकट से निपटने के लिए आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है और तय किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सप्लाई में प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, सिलेंडरों की जमाखोरी रोकने और पैनिक बुकिंग से बचने के लिए नया नियम लागू किया गया है, इसके तहत उपभोक्ता बीते सिलेंडर मिलने के 25 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक कर सकते है। इधर विपक्ष के कुछ नेताओं ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए हैं। सीपीआई(एम) सांसद डॉ.जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में ज्यादा सक्रिय है, जबकि देश में एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर होटल और रेस्तरां उद्योग पर पड़ सकता है। लागत बढ़ने के कारण खाने-पीने की चीजें महंगी होने की संभावना है। केंद्र सरकार फिलहाल अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों से गैस आयात बढ़ाने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है। आशीष दुबे / 11 मार्च 2026